वीजा अवधि 6 से घटाकर 2 साल करने का प्रस्ताव
H-1B, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और अमेरिकन ड्रीम का सपना देख रहे टेक दिग्गजों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर है। अमेरिकी संसद में एक नया आव्रजन (इमिग्रेशन) विधेयक पेश किया गया है। इस नए बिल के तहत अगर कानून बना तो एच-1बी वीजा से ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) पाने का पारंपरिक रास्ता हमेशा के लिए बंद हो सकता है।
रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय द्वारा पेश किए गए अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट आॅफ 2026 नामक इस बिल में एच-1बी वीजा की अवधि को भी 6 साल से घटाकर महज 2 साल करने और वीजा धारकों के वेतन के नियमों को बेहद कड़ा करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह बिल भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिका में काम कर रहे हजारों विदेशी कर्मचारियों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन सकता है।
एच-1बी वीजा के डुअल इंटेंट नियम को समाप्त करने का प्रस्ताव
इस बिल का सबसे विवादित प्रावधान एच-1बी वीजा के डुअल इंटेंट नियम को समाप्त करना है। अभी तक एच-1बी वीजी धारक अमेरिका में नौकरी करते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसे ही डुअल इंटेंट कहा जाता है। नए प्रस्ताव के अनुसार, एच-1बी आवेदकों को यह साबित करना होगा कि उनका स्थायी निवास अमेरिका के बाहर है और वे उसे छोड़ने का इरादा नहीं रखते। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रावधान लागू हुआ, तो एच-1बी से ग्रीन कार्ड पाने का पारंपरिक रास्ता लगभग असंभव हो जाएगा।
एच-1बी कर्मचारियों के लिए सख्त नियम
- एच-1बी कर्मचारियों को 75वें प्रतिशत के अनुसार उच्च वेतन देना होगा।
- कंपनियों को पहले यह साबित करना होगा कि योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं।
- नौकरी के विज्ञापन सरकारी प्लेटफॉर्म पर डालने होंगे।
- यदि कोई अमेरिकी उम्मीदवार समान या बेहतर योग्य है, तो उसे प्राथमिकता देनी होगी।
- किसी कंपनी में गैर-आप्रवासी कर्मचारियों की संख्या कुल कार्यबल के 5% से अधिक नहीं हो सकेगी।
- एच-1बी आवेदन से एक वर्ष पहले तक संबंधित पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जा सकेगी।
भारतीयों पर सबसे अधिक असर
भारत एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में लगभग 4 लाख नए एच-1बी वीजा स्वीकृत हुए, जिनमें से करीब 2.83 लाख भारतीय नागरिकों को मिले। यह कुल स्वीकृत वीजा का लगभग 71% है। इसके अलावा, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियों में 12.6 लाख से अधिक भारतीय, अपने परिवारों सहित, प्रतीक्षा सूची में हैं।
ये भी पढ़ें : Business News Update : भारत-अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार समझौते पर किया मंथन

