ईरानी संसद के अध्यक्ष ने स्विट्जरलैंड से वापस लौटकर दिया बड़ा बयान
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी में शुरू हुई जंग अब पूरी तरह से थम चुकी है। इसके साथ ही दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने स्विट्जरलैंड में स्थाई समझौते के लिए पहले दौर की वार्ता भी पूरी कर ली है। इस वार्ता में शामिल होने के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ कर रहे थे। स्विट्जरलैंड में चली इस वार्ता में कुछ अहम पहलुओं पर सहमति बनी जिसके बाद ईरान को तेल बेचने की अनुमति भी मिल गई।
वहीं स्विट्जरलैंड से वापस लौटने के बाद गालिबाफ ने तकनीकी वार्ता पर संतुष्टि जाहिर की। हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर गालिबाफ का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब युद्ध से पहले वाली स्थिति में कभी नहीं लौटेगा। गालिबाफ ने साफ किया कि अब ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते का प्रबंधन अपने इंतजामों के हिसाब से करेगा, हालांकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया जाएगा।
वार्ता में ईरान का पक्ष मजबूती से रखा
गालिबाफ ने अमेरिका के साथ हुई तकनीकी बातचीत के बाद बताया कि ईरान ने इस वार्ता में अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने दावा किया कि ईरान के दबाव की वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट भी बदलनी पड़ी। इस पोस्ट में ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि वह लेबनान में हिजबुल्लाह जैसे अपने सहयोगी समूहों की मदद करना बंद करे। गालिबाफ ने इसे ईरान के कूटनीतिक प्रभाव का बड़ा सबूत बताया।
अमेरिका पर नहीं किया जाएगा भरोसा
क्षेत्रीय स्थिति पर बात करते हुए गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका पर भरोसा करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा, हमने कभी अमेरिकियों पर भरोसा नहीं किया, न अब करते हैं और भविष्य में भी उन पर अविश्वास करना ही सही होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर ईरान स्विट्जरलैंड की बातचीत में शामिल नहीं होता, तो लेबनान में मुसलमानों और शियाओं का और ज्यादा खून बहता। उनके अनुसार, इन वार्ता ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ने से रोकने में मदद की है।
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