अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में 30 प्रतिशत गिरावट, 60 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है कीमत
Crude Oil Price (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी में शुरू हुए युद्ध के बाद जैसे ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया तो इसका सबसे ज्यादा असर कच्चे तेल और एलपीजी सप्लाई पर पड़ा। वहीं दूसरी तरफ ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए जिससे वहां पर कच्चे तेल का उत्पादन प्रभावित हुआ।
इन दोनों कारणों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो चुका है। जिससे कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा से गिरावट शुरू हो चुकी है। अंतरराष्टÑीय बाजार में कच्चे तेल के दाम औंधे मुंह गिर रहे हैं। हालांकि अभी भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की ज्यादा संभावना नहीं है।
भारतीय कंपनियां कर रहीं Crude Oil रिकवरी
भू-राजनीतिक तनाव कम होने से ब्रेंट क्रूड ने युद्ध के दौरान हुई अपनी सारी बढ़त को गंवा दी है और इसमें 30 फीसदी की गिरावट देखी गई। हालात सामान्य होने की स्थिति में ब्रेंट क्रूड के दाम इस साल के अंत तक गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकते हैं।?इस राहत से भारत की सरकारी तेल कंपनियों को घाटे की भरपाई करने में मदद मिलेगी, जिन्हें 30 जून तक 74,781 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत देने पर विचार कर सकती है।
खाड़ी देशों में दोबारा उच्च स्तर पर पहुंचा Crude Oil उत्पादन
सऊदी अरब पिछले हफ्ते के अंत में अपने विशाल रास तनुरा टर्मिनल से शिपमेंट को फिर से शुरू करने के बाद पिछले स्तर के करीब 90 फीसदी पर कच्चे तेल को लोड करने में कामयाब रहा। सऊदी अरब की यह वापसी उसके पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात जैसी ही है, जिसने पिछले महीने अपने तेल निर्यात को युद्ध-पूर्व स्तर यानी 39 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक पर बहाल कर दिया था। अनुमान है कि होर्मुज के रास्ते अब तेल आपूर्ति एक करोड़ बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गई है। इससे बाजार में तेल की बाढ़ आ गई है। वह भी ऐसे समय जब युद्ध के समय अपनाए कई वैकल्पिक उपाय अब भी लागू हैं।
अमेरिका-ईरान में समझौता लागू रहना जरूरी
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य में भी शांति समझौता पूरी तरह से लागू रहना जरूरी है। यदि भविष्य में इन दोनों देशों में तनाव की स्थिति बनती है या फिर ईरान होर्मुज को लेकर नए आदेश जारी करता है तो कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है जिससे इसकी कीमतों में दोबारा से तेजी आ जाएगी। इससे न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर होगा बल्कि इससे वैश्विक विकास भी प्रभावित होगा।
ये भी पढ़ें : Ethanol fuel : पूरी तरह सुरक्षित है इथेनॉल मिश्रित ईंधन : हरदीप पुरी

