
Shoaib Akhtar Drug Trafficking News: पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जब भी भारत में क्रिकेट खेलने आते थे, तब वे अपने साथ ड्रग्स लेकर आते थे। यह सनसनीखेज दावा भारत सरकार के गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने न्यूज एजेंसी ANI के एक पॉडकास्ट में किया है। पूर्व अफसर के मुताबिक जब भी पाकिस्तान की क्रिकेट टीम या उसका कोई ऑफिशियल डेलीगेशन इंडिया टूर पर आता था, तब उसके कुछ सदस्य ड्रग्स की तस्करी में शामिल होते थे। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के दिग्गज खिलाड़ी शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जैसे खिलाड़ियों के नाम भी इस मामले में सामने आए थे। आरवीएस मणि ने आरोप लगाया कि इस पूरी गतिविधि के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की भूमिका थी। हालांकि अभी तक इन आरोपों पर पाकिस्तान के इन खिलाड़ियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पूर्व अफसर ने अपने कार्यकाल का दिया हवाला
आरवीएस मणि ने बताया कि 2006 से 2010 के बीच जब वे गृह मंत्रालय के इंटरनल सिक्योरिटी डिवीजन में अंडर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे, तब पाकिस्तान से आने वाले डेलीगेशन से जुड़ी कई संवेदनशील सूचनाएं मंत्रालय के पास आती थीं। उस दौरान सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आती थी कि पाकिस्तान से भारत आने वाले कई डेलीगेशन ड्रग्स लेकर आते थे। मणि ने कहा कि उनका कार्यकाल जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और आतंकवाद से जुड़े मामलों से संबंधित था, इसलिए उन्हें इस तरह की सुरक्षा रिपोर्ट्स तक पहुंच थी।
शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का लिया नाम
पॉडकास्ट के दौरान आरवीएस मणि ने दावा किया कि एक मामले में शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ ने पाकिस्तान के तत्कालीन हाई कमिश्नर के सामने यह स्वीकार किया था कि वे ड्रग्स लेकर भारत आए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद दोनों खिलाड़ियों को वापस भेज दिया गया था। हालांकि उन्होंने इस कथित घटना से जुड़े किसी आधिकारिक दस्तावेज, जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष का सार्वजनिक रूप से जिक्र नहीं किया। आरवीएस मणि ने दावा किया कि पाकिस्तान से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों द्वारा लाई जाने वाली ड्रग्स व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं होती थी। यह संगठित ड्रग्स तस्करी का हिस्सा था। जब भी पाकिस्तान की कोई टीम, सांस्कृतिक दल या अन्य आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भारत आता था, तब ड्रग्स ट्रैफिकिंग की कोशिशें भी होती थीं।
🚨 BIG REVELATION: Pakistani cricketers, delegation members & players like Shoaib Akhtar & Mohammad Asif used to traffic drugs into India on every tour.
In one reported case, they panicked and self-confessed. Their coach Bob Woolmer, who called out the trafficking, DIED under… pic.twitter.com/9NAnR4dIkj
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) July 14, 2026
ड्रग्स से होती है आतंकवाद की 30 फीसदी फंडिंग
पूर्व अधिकारी ने आतंकवाद और ड्रग्स तस्करी के बीच संबंध का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के अनुसार भारत में होने वाली लगभग 30 प्रतिशत आतंकी गतिविधियों की फंडिंग ड्रग्स ट्रैफिकिंग से होती थी। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय में इस विषय पर लगातार चर्चा होती थी और ड्रग्स की तस्करी को आतंकवाद के आर्थिक स्रोतों में से एक माना जाता था। मणि ने आरोप लगाया कि भारत में ड्रग्स भेजना पाकिस्तान की एक संगठित नीति का हिस्सा था। मणि का आरोप है कि यह गतिविधि सुनियोजित थी और इसके पीछे ISI का हाथ था। अपने कार्यकाल की चर्चाओं को याद करते हुए आरवीएस मणि ने कहा कि गृह मंत्रालय के भीतर एक तरह का आकलन किया जाता था कि अगर अफगानिस्तान के जलालाबाद क्षेत्र में अफीम की फसल अच्छी हुई है तो भारत में ड्रग्स की तस्करी और उसके जरिए आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकारी इस बात पर नजर रखते थे कि अफीम का उत्पादन कितना हुआ है, क्योंकि उसका असर भारत की आंतरिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता था।
बॉब वूल्मर की मौत का भी किया जिक्र
आरवीएस मणि ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के दिवंगत कोच बॉब वूल्मर का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि वूल्मर पाकिस्तानियों द्वारा ड्रग्स तस्करी का विरोध करते थे और इसके कुछ समय बाद उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बॉब वूल्मर का निधन 18 मार्च 2007 को वेस्टइंडीज में आयोजित क्रिकेट विश्व कप के दौरान जमैका के एक होटल में हुआ था। उनकी मौत की जांच लंबे समय तक चर्चा में रही, लेकिन जांच में उनकी मौत को लेकर अलग-अलग निष्कर्ष सामने आए और किसी आपराधिक साजिश का खुलासा नहीं हुआ। पॉडकास्ट में जब आरवीएस मणि से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान जैसी व्यवस्था हाई-प्रोफाइल क्रिकेटरों का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी के लिए कर सकती है, तो उन्होंने कहा कि शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जैसे बड़े नामों के अलावा अन्य लोग भी इसमें शामिल हो सकते थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारतीय खुफिया ब्यूरो इन गतिविधियों पर नजर नहीं रखती थी, तो उन्होंने जवाब दिया कि आईबी का काम जानकारी और अलर्ट देना होता है, जबकि आगे की कार्रवाई संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है।
