परिजन बोले- गुड़िया कांड में सच बोलने की वजह से दिनेश शर्मा को प्रताड़ित किया जा रहा
Kotkhai Gudiya Case, (द भारत ख़बर), शिमला: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में साल 2017 में हुए कोटखाई का गुड़िया केस फिर से चर्चा में है। कोटखाई थाने में आरोपी नेपाली सूरज की कस्टोडियल डेथ मामले के अहम गवाह रहे हिमाचल पुलिस के कांस्टेबल दिनेश शर्मा को निलंबित कर दिया गया है। ऐसे में अब उनके निलंबन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
गौर रहे कि दिनेश हाल ही में अपनी पोस्टिंग को लेकर राजभवन गए थे और इसी की गाज उन पर गिरी है। कांस्टेबल दिनेश शर्मा पांच वर्ष से चौपाल में सेवारत था। निलंबित करने से पहले उसका तबादला शिमला के ननखड़ी के लिए किया था। निलंबन के बाद कांस्टेबल का मुख्यालय भी ननखड़ी तय किया है, यानि उन्हें ननखड़ी थाने में रिपोर्ट करना पड़ेगा।
दिनेश शर्मा के भाई और मां ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
गुरुवार को शिमला में दिनेश शर्मा के भाई सुरेश शांडिल्य और उनकी मां ने प्रेस वार्ता कर हिमाचल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। परिवार का दावा है कि गुड़िया कांड में सच बोलने की वजह से दिनेश शर्मा को वर्षों से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ महीने में दिनेश शर्मा का पांच बार तबादला किया गया और अपनी पारिवारिक परिस्थितियों के चलते तबादला रोकने की गुहार लगाने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया।
बयान बदलने और पुलिस अधिकारियों के पक्ष में गवाही देने का दबाव बनाया गया
सुरेश शांडिल्य ने बताया कि वर्ष 2017 में कोटखाई के चर्चित गुड़िया कांड के दौरान कथित आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई ने की और उस समय दिनेश शर्मा ड्यूटी पर तैनात थे। उन्होंने दावा किया कि दिनेश शर्मा को मामले में मुख्य गवाह बनाया गया।
परिवार का आरोप है कि उस समय उन पर बयान बदलने और पुलिस अधिकारियों के पक्ष में गवाही देने का दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और केवल सच बोलने की बात कही। बाद में उनकी गवाही के आधार पर सीबीआई की विशेष अदालत ने तत्कालीन आईजी सहित आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
दिनेश शर्मा की पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ रुके
सुरेश शांडिल्य ने आरोप लगाया कि सच बोलने के कारण वर्ष 2017 में ही दिनेश शर्मा को निलंबित कर दिया गया था। करीब छह महीने बाद उन्हें बहाल कर दिया गया, लेकिन उस समय शुरू की गई विभागीय जांच आज करीब नौ वर्ष बाद भी पूरी नहीं हुई है। उनका कहना है कि विभागीय जांच लंबित रहने से दिनेश शर्मा की पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ भी रुके हुए हैं।
एसपी बोले- आरोप झूठे, नियमों के तहत हुई कार्रवाई
एसपी गौरव सिंह का कहना है कि कांस्टेबल के परिवार की ओर से लगाए सभी आरोप झूठे हैं। पुलिस कंडक्ट रूल्स के तहत काम करती है। उसी के तहत कार्रवाई की गई है। निलंबन जांच के बाद ही किया है। जांच में उनके द्वारा किए कई मिस कंडक्ट भी सामने आए हैं। नेताओं से फोन करवाना नियमों के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री बोले-सेवा नियमों के अनुसार ही कार्रवाई होती है, किसी को भी मनमाने तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पुलिस एक अनुशासित बल है और सभी कर्मचारी पुलिस महानिदेशक के अधीन आते हैं। उन्होंने कहा कि अगर दिनेश शर्मा को निलंबन को लेकर कोई शिकायत है, तो उन्हें पहले डीजीपी से शिकायत करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा नियमों के अनुसार ही कार्रवाई होती है और किसी को भी मनमाने तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल संवैधानिक पद पर हैं और अगर राज्यपाल की ओर से मामले में कोई टिप्पणी या निर्देश आता है, तो सरकार उसका सम्मान करते हुए मामले को देखेगी।
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