चरखी दादरी. उम्र सिर्फ एक संख्या है, इस बात को हरियाणा के चरखी दादरी स्थित बाढड़ा निवासी 76 वर्षीय बुजुर्ग धावक रामकिशन शर्मा ने सच साबित कर दिखाया है. 65 वर्ष की उम्र में मास्टर्स एथलेटिक्स में कदम रखने वाले रामकिशन शर्मा ने ट्रैक पर ऐसा तूफान खड़ा किया कि देश और दुनिया उन्हें अब ‘मेडल मशीन’ के नाम से जानती है.
रामकिशन शर्मा की इस असाधारण उपलब्धि को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ द्वारा आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया गया है. रिकॉर्ड टीम के सत्यापन में उनके नाम 401 मेडल और 336 प्रमाण पत्र दर्ज किए गए हैं. महज 7 से 9 साल के अपने खेल करियर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर पदकों का अंबार लगा दिया है.
राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम
रामकिशन शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए 10 गोल्ड मेडल जीते हैं. वहीं, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके नाम 162 गोल्ड, 27 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज सहित राज्य स्तर पर 98 गोल्ड मेडल दर्ज हैं. वे 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर, 800 मीटर दौड़ के अलावा लॉन्ग जंप, ट्रिपल जंप व हर्डल रेस जैसी कठिन स्पर्धाओं में लगातार पोडियम फिनिश करते रहे हैं.
पद्मश्री और गिनीज बुक पर नजर
प्रमाण पत्र मिलने के बाद अब रामकिशन शर्मा का लक्ष्य ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज कराना है. इसके साथ ही उन्होंने अपनी उपलब्धियों के आधार पर पद्मश्री पुरस्कार के लिए भी आवेदन किया है. खेलों के अलावा रामकिशन शर्मा पिछले करीब 35 वर्षों से नशामुक्ति अभियान से जुड़े हैं और 40 से अधिक ग्राम पंचायतों द्वारा सम्मानित हो चुके हैं. कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने आर्य समाज टीम के साथ मिलकर लगातार 62 दिनों तक सैनिटाइजेशन, मास्क और राशन वितरण कर मिसाल पेश की थी.
युवाओं को दिया फिटनेस मंत्र
रामकिशन शर्मा ने देश की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि नशा नाश की जड़ है, जो इंसान को अंदर से खोखला कर देता है. युवाओं को बीड़ी, सिगरेट, शराब और तंबाकू छोड़कर खेलों की तरफ आना चाहिए. सुबह 4 बजे उठकर मैदान में पसीना बहाएं, योग करें और खेलों में हिस्सा लेकर अपने जीवन को सफल व स्वस्थ बनाएं.

