नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व क्रिकेटर मौजूदा कोच गौतम गंभीर के काम करने के तरीके की लगातार आलोचना करते रहते हैं. ये बात उनको पसंद नहीं आती और मौका मिलते ही कटाक्ष करने से नहीं चूकते.भारत और श्रीलंका के बीच 23 अगस्त से दो टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला खेला जाना है. मैच से पहले टीम के मुख्य कोच ने उनकी टेस्ट कोचिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब दिया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने साफ कहा कि उनका टारगेट सोशल मीडिया पर मिलने वाले व्यूज या लाइक्स नहीं, बल्कि टीम के साथ ट्रॉफियां जीतना है.
भारतीय टीम ने दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 165 रन से जीतकर 1-0 की बढ़त हासिल की. गॉल टेस्ट में जीत हासिल करने के बाद भारत का इरादा कोलंबो का मैच अपने नाम कर मेजबान का क्लीन स्वीप करने का है. हालांकि यह काम इतना आसान नहीं होने वाला. श्रीलंका की टीम भले ही कमजोर नजर आ रही है लेकिन फिर भी वो घरेलू मैदान पर पिछले मैच को पांच दिन तक खींचने में कामयाब रही. औसत टीम के खिलाफ भी मुश्किल से जीत हासिल करने वाली टीम की कोचिंग पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर लगातार सवाल उठाते हैं. गौतम गंभीर की टेस्ट कोचिंग की आलोचना भी खूब होती है.

दूसरे टेस्ट से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर से जब इन सभी बातें को लेकर रिएक्शन मांगा गया तो उनका जवाब बेहद चुभने वाला था. उन्होंने कहा, “मेरा काम ट्रॉफी जीतना है, व्यूज और लाइक्स नहीं. हम टेस्ट क्रिकेट में बहुत खराब नहीं कर रहे हैं. यह बदलाव के दौर से गुजर रही टीम है, इसलिए उतार-चढ़ाव आएंगे.”
हालांकि गंभीर का बदलाव के दौर से टीम के गुजरने वाला बयान कई दिग्गजों के गले नहीं उतरता. रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन में अब भी टेस्ट क्रिकेट को काफी कुछ देने को था लेकिन संन्यास लेने पर मजबूर होना पड़ा. इसेक पीछे की वजह सभी इशारों में दे चुके हैं. रिपोर्ट में कोच और सीनियर खिलाड़ियों के बीच हुई बातों का भी जिक्र किया जा चुका है. पूर्व क्रिकेटर और क्रिकेट के जानकार यह मानते हैं कि आज टीम जिस बदलाव के तौर से गुजर रही है इसके पीछे की वजह कहीं ना कहीं कोच गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर हैं. जिन सीनियर से जाने से टीम को संघर्ष करना पड़ रहा है, उनको आसानी से रोका जा सकता था. बल्कि उनके दिए गए इंटरव्यू और करीबी का बातें यह साबित करती हैं कि इन तीनों में से कोई भी टेस्ट से संन्यास की सोच ही नहीं रहा था. फैसला अचानक ही लिया गया.

