
विपक्षी दल सरकार पर लगाते है उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने के आरोप
Corporate Loans, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सरकार द्वारा बड़े उद्योगपतियों के कर्ज पूरी तरह माफ नहीं किए जाते, बल्कि बैंकों द्वारा उन्हें राइट-आॅफ या इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के तहत हेयरकट दिया जाता है। विपक्षी दलों और रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बड़े कॉरपोरेट्स के लाखों करोड़ रुपए के लोन राइट-आॅफ या सेटल किए गए हैं।
हालांकि राजनीतिक दलों और विपक्षी नेताओं आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने बड़े कॉपोर्रेट घरानों और उद्योगपतियों के लगभग 10 से 16 लाख करोड़ रुपए तक के कर्ज माफ या राइट-आॅफ किए हैं।
सुभाष चंद्रा/एसेल ग्रुप (हालिया मामला – अगस्त 2026)
- कुल बकाया कर्ज: लगभग 22,006 करोड़ रुपए
- निपटान राशि: मात्र 6.5 करोड़ रुपए।
- विवरण: राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने मीडिया कारोबारी और एसेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत इस बेहद कम भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसमें बैंकों को लगभग 99.97% का भारी नुकसान (हेयरकट) उठाना पड़ा है।
डीएचएफएल (दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड)
- कुल कर्ज: 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक (लगभग $13.93 अरब)।
- विवरण: यह दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता के तहत समाधान पाने वाली पहली बड़ी वित्तीय सेवा कंपनी थी। वर्ष 2021 में पिरामल ग्रुप ने इसका अधिग्रहण किया था, जिसमें ऋणदाताओं को उनके बकाए का एक तय हिस्सा मिला।
भूषण पावर एंड स्टील
- कुल कर्ज: लगभग 49,000 करोड़ रुपए (लगभग $6.9 बिलियन)।
- विवरण: जेएसडब्ल्यू स्टील द्वारा इस मामले का समाधान किया गया। यह आईबीसी प्रक्रिया के तहत सबसे बड़े कर्ज समाधान और परिसंपत्ति हस्तांतरण मामलों में से एक है।
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज
- कुल कर्ज: लगभग 62,000 करोड़ रुपए से अधिक के दावे।
- विवरण: वेणुगोपाल धूत की कंपनी वीडियोकॉन के मामले में भी कर्जदाताओं को भारी हेयरकट का सामना करना पड़ा और वेदांता ग्रुप की कंपनी द्वारा इसके अधिग्रहण की प्रक्रिया चली।
बैंकों ने पिछले 12 सालों में 9.95 लाख करोड़ रुपए का कॉरपोरेट ऋण किया माफ
बैंकों ने पिछले 12 सालों में बड़े कॉरपोरेट को दिए गए 9.95 लाख करोड़ रुपये के ऋण माफ किए हैं। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में दी थी। उन्होंने बताया कि 2018-19 में ऋण माफी राशि 1,48,753 करोड़ रुपए पर पहुंच गई थी जोकि 2025-26 में घटकर 20,485 करोड़ रह गई है।
उन्होंने बताया कि हालांकि ऋण माफ करना एक अकाउंटिग प्रक्रिया है और इससे लोन धारकों को राहत नहीं मिलती है। बैंक रिकवरी की कार्रवाई जारी रखते हैं।
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