चंडीगढ़. हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का गुरुवार को 29वीं दिन है. प्रदेश में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमा गई है. सरकार लगातार सफाई कर्मचारियों से वार्ता कर रही है. लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हुए हैं.
दरअसल, हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से नायब सैनी सरकार की मुश्किलें बढ़ा हुई हैं. विपक्षी कांग्रेस की विधायक एवं पूर्व मंत्री गीता भुक्कल ने आरोप लगाया है कि सरकार सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण प्रदेश के कई शहरों और कस्बों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यभर में करीब 13,000 सफाई कर्मचारी और सीवरमैन हड़ताल पर हैं. कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है. हड़ताल के कारण कई इलाकों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है और सड़कों तथा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा हो रहा है.
कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन भी किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा. इस दौरान सफाई कर्मचारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प भी हुई है. पुलिस ने कुछ जिलों में केस भी दर्ज किए हैं और कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया है.
वाल्मीकि समाज की भागीदारी
गौरतलब है कि हरियाणा में सियासी तौर दलित आबादी 20 फीसदी है और राज्य की लगभग 47 ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां दलित मतदाताओं की आबादी 20% से अधिक है और वे चुनावी हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं. विधानसभा में कुल 90 सीटों में से 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं और ऐसे में भाजपा सरकार इस मुद्दे को बढ़ावा नहीं देता चाहती है.बीजेपी सरकार के लिए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सफाई कर्मचारियों और सरकार के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद चल रहा है और अहम बात है कि सफाई कर्मचारी समुदाय का राजनीतिक महत्व भी है. अधिकतर सफाई कर्मचारी वाल्मीकि समाज यानी दलित समुदाय से आते हैं और हरियाणा में 30 फीसदी से अधिक आबादी दलित है. ऐसे में कर्मचारियों की नाराजगी सरकार के लिए राजनीतिक चिंता का विषय बन सकती है.
मंत्री विपुल गोयल का अहम बयान
वहीं, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने कर्मचारियों से बातचीत कर गतिरोध खत्म करने की कोशिश की है. सरकार की ओर से बातचीत के लिए मंत्री और अधिकारियों को भी लगाया गया है, लेकिन कर्मचारी अभी हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं. शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि सरकार ने सफाई कर्मियों की लगभग सभी मांगों पर सहमति देते हुए समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पालिका रोल पर कार्यरत सफाई कर्मियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा के साथ वेतन वृद्धि व अन्य लाभ भी मिलेंगे. सभी सफाई कर्मी भाई-बहनों से अपील है कि वे काम पर लौटें और प्रदेश की स्वच्छता व्यवस्था को पुनः गति दे. सरकार आपके सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस का कहना है कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को हल करने के बजाय सरकार मामले को टाल रही है. पार्टी ने आरोप लगाया कि हड़ताल के चलते आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है और सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
“सरकार ने सफाई कर्मियों की लगभग सभी मांगों पर सहमति देते हुए समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पालिका रोल पर कार्यरत सफाई कर्मियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा के साथ वेतन वृद्धि व अन्य लाभ भी मिलेंगे।
सभी सफाई कर्मी भाई-बहनों से अपील है कि वे काम पर लौटें और प्रदेश की… pic.twitter.com/cua7EHXgbI

