Satyendar Jain Gets Bail: आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को जैन की जमानत याचिका मंजूर कर ली। यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसकी जांच दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच कर रही है।
18 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी
सत्येंद्र जैन को एंटी-करप्शन ब्यूरो ने 18 अगस्त 2026 को इस मामले में गिरफ्तार किया था। उनके साथ दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय समेत अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद जैन को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके बाद जैन की ओर से जमानत याचिका दायर की गई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 25 अगस्त को अपना फैसला 3 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को कोर्ट ने जमानत पर अपना आदेश सुनाते हुए जैन को राहत दे दी।
क्या है DJB का STP टेंडर मामला?
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को अपग्रेड और उनकी क्षमता बढ़ाने से जुड़े टेंडर की प्रक्रिया से संबंधित है। ACB ने आरोप लगाया है कि टेंडर की शर्तों और तकनीकी मानकों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और एक खास निजी कंपनी को फायदा पहुंचा। जांच एजेंसी का आरोप है कि STP परियोजनाओं की तकनीकी जरूरतों और लागत से जुड़े फैसलों में अनियमितताएं हुईं। ACB ने यह भी दावा किया है कि कुछ तकनीकी सिफारिशों में बदलाव और परियोजना की क्षमता बढ़ाने से जुड़े फैसलों का असर टेंडर की अनुमानित लागत पर पड़ा।
ACB का सत्येंद्र जैन पर क्या आरोप?
ACB ने अदालत में आरोप लगाया था कि दिल्ली के तत्कालीन जल मंत्री के तौर पर सत्येंद्र जैन ने DJB के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर STP टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया। जांच एजेंसी के अनुसार, तकनीकी सिफारिशों में बदलाव, STP की क्षमता बढ़ाने और लागत अनुमान में संशोधन जैसे कदमों का इस्तेमाल टेंडर की शर्तों को एक विशेष कंपनी के अनुकूल बनाने के लिए किया गया। ACB ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत में यह भी कहा था कि जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और जैन के प्रभाव के चलते गवाहों या सबूतों को प्रभावित करने की आशंका हो सकती है।
जैन की ओर से क्या दलील दी गई?
सत्येंद्र जैन की कानूनी टीम ने गिरफ्तारी की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं और लंबे समय से दर्ज FIR के बावजूद उनकी गिरफ्तारी काफी देर बाद की गई। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि STP की क्षमता बढ़ाने से जुड़े फैसले तकनीकी अधिकारियों और समितियों की सिफारिशों के आधार पर लिए गए थे। जैन ने अपनी ओर से यह भी कहा था कि बतौर मंत्री वह तकनीकी मामलों में इंजीनियरों और अधिकारियों की सलाह पर निर्भर थे। उनके वकीलों ने अदालत से कहा था कि उनकी हिरासत जारी रखने की आवश्यकता नहीं है और उनकी मौजूदगी सुनिश्चित की जा सकती है।

