नई दिल्ली. कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक इस वक्त तिहाड़ जेल में बंद हैं. उन्होने जेल से ही अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल मलिक को तलाक देने का फैसला लिया है. मलिक ने जम्मू की TADA/POTA अदालत में 25 पन्नों का एक हलफनामा दाखिल किया है. तिहाड़ जेल में बंद मलिक ने जो हलफनामे दायर किया है उसमें मां, पत्नी मुशाल और बेटी के नाम खास संदेश भेजा है.
यासीन की तरफ से जो हलफनामा दाखिल किया गया है उसमें कई अहम बातें उन्होंने बताई. इसमें सबसे खास था पत्नी मुशाल से जुड़ा हुआ मैसेज. इसमें कहा गया है कि उन्होंने अपनी पत्नी की आवाज तकरीबन 8 साल पहले सुनी थी. तब से अब तक वो इसके लिए तरस रहे हैं उनको फोन पर बात करने या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करने की अनुमति नहीं मिली है. मलिक ने उनके खिलाफ किए गए इस फैसले को बेहद पीड़ादायक बताया. साथ ही इससे जुड़ी हुई बेहद जरूरी बात कही.
यासीन मलिक का कहना था कि वो ऐसा कभी नहीं चाहेंगे कि उनकी पत्नी मुशाल अपनी बची हुई बाकी की जिंदगी तकलीफ से गुजारें. उनके मुताबिक वो ऐसी परिस्थितियों के बोझ और अनिश्चितता में गुजार रहे जीवन को छुटकारा दिलाना चाहते हैं. यासीन की चाहत है कि उनकी पाकिस्तानी पत्नी उस रिश्ते को खत्म करे. आगे की बची लाइफ को सम्मान और उम्मीद के साथ नए सिरे शुरू करे.
यासीन मलिक ने अपनी बेटी के लिए भी एक बेहद भावुक संदेश लिखा. उनका कहना था की उनकी बेटी अपना मां के साथ ना जाकर दादी के करीब रहे. जिस तरह की मुश्किल परिस्थिति से वो इस समय गुजर रही हैं उसमें बेटी को साथ देने की अपील की है. यासीन ने अपने हलफनामे में इस बात को भी साफ तौर पर कहा कि वो इसे किसी तरह की दया या सहानुभूति हासिल करने के इरादे से नहीं कर रहे . जो कुछ भी उन्होंने बयां किया है वो अंतरात्मा का आखिरी बयान है. पिता के इस हलफनामे के सामने आने के बाद बेटी ने गहरी भावनात्मक परेशानी जाहिर की है.
यासीन मलिक को जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाया गया था. उनके ऊपर इससे जुड़े आतंकी फंडिंग का मामला चलाया गया और वो दोषी साबित हुए. मई 2022 में कोर्ट ने उनको उम्रकैद की सजा सुनाई थी. 2019 से ही यासीन मलिक जेल में बंद है. अब उनके पत्नी से अलग होने के फैसले से जुड़े हलफनामे ने फिर से उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

