
नई दिल्ली. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कोर्ट में एक और मामला निराधार निकला. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर दाखिल याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी. याचिका में राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता पर सवाल उठाया गया था. इसके आधार पर उनकी रायबरेली से लोकसभा सदस्य में चुने जाने को चुनौती दी गई थी. राहुल गांधी के खिलाफ कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ताओं बिना कोई दस्तावेज के ही ये कोरा दावा करने पहुंच गए थे.
राहुल गांधी पर पूरे देश में कही ना कहीं से उनपर सवाल उठाने वाले निकल आते हैं. उनके भारत के नागरिक होने तक को लेकर सवाल उठाने से लोग नहीं चूकते. ऐसा ही एक मामला कोर्ट में चल रहा था जिसे खारिज कर दिया गया.. याचिकाकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया था कि राहुल के पास ब्रिटिश नागरितका है जबकि इसके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया गया. अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभ्देश कुमार चौधरी की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी. याचिका अधिवक्ता अशोक पांडे और एक अन्य याचिकाकर्ता ने दाखिल की थी. इसमें राहुल गांधी को “श्री राहुल गांधी @ राउल विंची” के नाम से संबोधित किया गया था.
अशोक पांडे ने याचिका दायर करते हुए ऐसा दावा किया था कि नेता प्रतिपक्ष के पास भारत की नागरिकता ही नहीं है. याचिकाकर्ता का कहना था कि वो ब्रिटेन के नागरिक हैं. इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने उनके खिलाफ क्वो वारंटो जारी करने और लोकसभा सदस्य के पद पर बने रहने के अधिकार पर सवाल उठाया था. ऐसा दावा किया गया था कि 21 अगस्त 2003 को ब्रिटेन में राहुल गांधी ने Backops Limited नाम की कंपनी बनाई थी. ऐसा बताया जा रहा था कि कंपनी के रिकॉर्ड में राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश का नागरिक बताया था.
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा गया कि जो आरोप वो लगा रहे हैं, उसके समर्थन में दस्तावेज पेश करें. अशोक पांडे जो याचिकाकर्ता हैं वो कंपनी के गठन का कोई दस्तावेज नहीं दे पाए. उनके पास ब्रिटेन के कंपनी रजिस्ट्रार का रिकॉर्ड भी नहीं था. यहां तक कि जो याचिका का आधार था कि राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया है उससे जुड़ा कोई दस्तावेज भी नहीं दे पाए.
