India Russia bilateral Meeting (द भारत ख़बर) नई दिल्ली: ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 45 मिनट तक चली इस बैठक में मोदी-पुतिन ने ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में अपने देशों के बीच खास रिश्तों को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश
भारत के विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा कि नई दिल्ली एक तरह से कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। वह अमेरिका, खाड़ी के अरब देशों, रूस, ईरान और इजराइल के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखना चाहता है। भारत को यूक्रेन और ईरान युद्धों के कारण शिपिंग और व्यापार में आ रही रुकावटों का भी सामना करना पड़ रहा है।
दो हफ्तों में दूसरी मुलाकात
दोनों नेताओं के बीच दो हफ्तों में यह दूसरी मुलाकात थी। यह बैठक नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) नेताओं के सालाना शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई नेता शामिल होने वाले हैं। यह समूह अपनी पहचान और अहमियत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि इसके सदस्य ईरान युद्ध को लेकर बंटे हुए हैं।
संघर्षों को कूटनीति से सुलझाने पर जोर
भारत के विदेश मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, मोदी और पुतिन ने ‘पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों पर अपने विचार साझा किए, जिनका असर समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ा है।’ बयान में कहा गया कि मोदी ने फिर से ज़ोर दिया कि संघर्षों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाया जाना चाहिए और भारत शांति प्रयासों में मदद के लिए तैयार है।
मजबूत ऊर्जा संबंधों को अहमियत
चीन के साथ-साथ भारत भी रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। माना जाता है कि इससे मॉस्को को अपना बजट बनाए रखने में मदद मिली है, खासकर तब जब 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद उस पर पश्चिमी देशों ने कड़े प्रतिबंध लगाए थे। भारत ने इस व्यापार को कम करने के दबाव का विरोध किया है। उसका कहना है कि उसकी बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था को सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद एनर्जी सप्लाई की ज़रूरत है। नई दिल्ली ने यह भी कहा है कि यूक्रेन विवाद को केवल बातचीत और कूटनीति से ही सुलझाया जा सकता है, न कि कुछ देशों द्वारा रूस के साथ एनर्जी, मेटल या फर्टिलाइज़र का व्यापार रोककर।
क्रूड इंपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी बढ़ी
भारतीय क्रूड इंपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी 2026 में बढ़ी और जुलाई में यह रिकॉर्ड 51% तक पहुंच गई, क्योंकि मिडिल ईस्ट से सप्लाई में रुकावट के कारण भारतीय रिफाइनर रूसी तेल पर ज्यादा निर्भर हो गए थे। भारतीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में यह हिस्सेदारी शायद थोड़ी कम हुई क्योंकि चीन ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी थी।

