फरीदाबाद. हरियाणा स्थित फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव को फूलों का हब कहा जाता है. गांव में किसान रजनीगंधा समेत कई तरह के फूलों की खेती करते हैं. यहां धान, गेहूं, मक्का, ज्वार और बाजरा की खेती भी होती है. कुछ किसान सब्जियों की खेती भी करते हैं. खेती में किसानों के सामने मौसम की परेशानी बनी रहती है. कई बार बारिश या मौसम में बदलाव की वजह से सब्जियां खराब हो जाती हैं. धान की फसल में भी मौसम खराब होने पर नुकसान का डर रहता है. गेहूं की फसल के साथ भी यही परेशानी रहती है. ऐसे में गांव के कुछ किसानों ने खेती में बदलाव करने का फैसला किया है. इन किसानों ने अपनी जमीन पर अलग तरह की फसल और बाग लगाने शुरू किए हैं. फतेहपुर बिल्लौच गांव के किसान मुकेश ने भी एक एकड़ जमीन में आंवला का बाग लगाया हुआ है. मुकेश का कहना है कि आंवला की खेती से उन्हें धान और गेहूं की खेती के मुकाबले ज्यादा फायदा मिल रहा है.
कौन सी वैरायटी
लोकल 18 से फतेहपुर बिल्लौच गांव के किसान मुकेश बताते हैं कि मैंने एक एकड़ जमीन में आंवला के करीब 90 पेड़ लगाए हुए हैं. यह फर्स्टटेड वैरायटी मानी जाती है. आंवला की खेती करते हुए मुझे करीब 5 साल हो गए हैं. आंवला के पौधे बेंगलुरु से लेकर आया था. इसके बाद अपनी एक एकड़ जमीन में आंवला का बाग तैयार किया. आंवला की खेती में लागत ज्यादा नहीं आती है. एक पेड़ करीब 200 से 300 रुपये में मिल जाता है. इसके बाद पेड़ तैयार होने पर आंवला से कमाई होती है. धान और गेहूं की खेती में मौसम की वजह से फसल खराब होने का डर बना रहता है. आंवला के पेड़ से मुझे अच्छी कमाई हो रही है.
मुकेश बताते हैं कि आंवला 50 से 60 रुपये किलो तक बिक जाता है. हालांकि भाव समय के हिसाब से बढ़ते और घटते रहते हैं. एक सीजन में एक एकड़ के बाग से करीब 1 से डेढ़ क्विंटल आंवला टूट जाता है. मुकेश कहते हैं कि आंवला के पेड़ों के नीचे फ्राई कश भी लगाया हुआ है. इससे एक ही जमीन से दूसरी कमाई भी हो जाती है. फ्राई कश का इस्तेमाल शादियों में डेकोरेशन के लिए किया जाता है. इसकी मांग दिल्ली की मंडी में भी रहती है. फ्राई कश को दिल्ली की गाजीपुर मंडी में भेजते हैं.