फरीदाबाद: विकास के चमकते दावों के बीच फरीदाबाद के सोतई गांव की एक तस्वीर ऐसी भी है, जहां लोग आज भी पक्की सड़क के इंतजार में हैं. जिस रास्ते से परिवार पिछले 51 सालों से आना-जाना कर रहा है, वह आज तक पक्का नहीं हो सका है. हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से महज 25 से 30 मीटर की दूरी पर जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी से जुड़ा फ्लाईओवर बन रहा है, लेकिन यहां रहने वाले परिवारों के लिए सड़क अब भी कच्ची है. बरसात आते ही हालात और खराब हो जाते हैं और लोगों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि नेताओं से लेकर प्रशासन और पार्षदों तक कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. एक तरफ फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने की बातें होती हैं, शहर की मुख्य सड़कों को चमकाया जाता है. वहीं गांव के अंदर की यह तस्वीर विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है. आखिर 51 साल में भी इस रास्ते की सूरत क्यों नहीं बदली. आइए जानते हैं ग्रामीणों ने क्या बताया.
1954 में हुई थी चकबंदी
लोकल18 से बातचीत में ग्रामीण बबलू हुड्डा बताते हैं कि यहां 1954 में चकबंदी हुई थी और उसी समय से यह रास्ता नहीं बना है. यहां रहने वाले सभी परिवार मूल रूप से फरीदाबाद के दयालपुर गांव के रहने वाले हैं. इनके दादा परदादा ने सोतई गांव में जमीन खरीदी थी. 1965 में जमीन खरीदी गई और 1975 में यहां रहना शुरू किया गया. 1975 से 2026 तक 51 साल बीत चुके हैं, लेकिन रास्ते की हालत में कोई बदलाव नहीं आया. इतने समय में कई पंचवर्षीय योजनाएं आ गईं और चली गईं. ग्रामीण हर बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अपने मत का इस्तेमाल करते हैं. वर्ष 2022 में सोतई गांव नगर निगम में शामिल हो गया और अब यहां पार्षद भी है. चूंकि ये परिवार दयालपुर गांव के निवासी हैं, इसलिए दयालपुर गांव के सरपंच के चुनाव में भी वोट करते हैं. सामने नगर निगम है, लेकिन धरातल पर समस्या आज भी खड़ी है.
आजादी के बाद से ही नहीं हुआ गांव का विकास
बबलू हुड्डा बताते हैं जब अंग्रेज हमारे यहां थे, उस समय सोहना में एक गांव था, जिसे अंग्रेज कच्चे रास्ते पर ही छोड़कर गए थे. वहां के लोग क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहते थे. कागजों में वह गांव कच्चे रास्ते वाला दर्ज रहा और आज भी उसकी स्थिति वैसी ही है. मेरा सवाल है कि इस गांव को कच्चे रास्ते पर कौन छोड़कर गया था. आखिर क्या वजह है कि इतने साल बीतने के बाद भी यहां सड़क नहीं बन पाई. हमारे जनप्रतिनिधियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए. आज भी लोग धरातल पर कच्चे रास्ते की समस्या झेल रहे हैं. यहां से महज 25 से 30 मीटर की दूरी पर जेवर एयरपोर्ट का काम चल रहा है.
जहां फ्लाईओवर का उतार है, वह भी करीब 100 मीटर के दायरे में है. इस कनेक्टिविटी के कारण आसपास की जमीन और प्रॉपर्टी के दाम काफी बढ़ गए हैं. सरकार सबका साथ और सबका विकास की बात करती है, तो फिर इस रास्ते का विकास क्यों नहीं हुआ. चौधरी चरण सिंह कहा करते थे कि देश का रास्ता ग्रामीण क्षेत्रों से होकर निकलता है. सीमाओं पर तैनात जवानों में भी बड़ी संख्या देहात के बच्चों की है. नगर निगम की तीसरी सरकार बन चुकी है, अब इन्हें भी इस परिवार और रास्ते की सुध लेनी चाहिए.
बचपन से ही देख रहा हूं इस सड़क की दुर्दशा
स्थानीय निवासी मुकुल हुड्डा बताते हैं कि मैं सोतई गांव का निवासी हूं, जबकि मूल रूप से फरीदाबाद के दयालपुर गांव से हूं. मेरी उम्र 26 साल है और मेरा जन्म इसी सोतई गांव में हुआ है. बचपन से ही मैं इस सड़क की दुर्दशा देखते आ रहा हूं. मेरे जन्म से करीब 25 साल पहले से ही यह रास्ता इसी हालत में है. हमने अपने खर्चे से यहां ईंटें बिछवाई हैं. अगर हम अपनी तरफ से यह इंतजाम नहीं करते तो स्थिति और खराब होती. बारिश के बाद रास्ते की मरम्मत भी खुद ही करवानी पड़ती है. हर चुनाव में हम हिस्सा लेते हैं और विधानसभा तथा लोकसभा के लिए मतदान करते हैं, इसके बावजूद सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है.

