Election commission accusations: चुनाव आयोग को लेकर देश के एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट पर सियासी बवाल मच गया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने बीते कुछ महीनों के दौरान कई मुद्दों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से असहमति जताई है। हालांकि, चुनाव आयोग ने साफ किया है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और नजरिए का होना एक सामान्य बात है।
इन 2 सदस्यों ने उठाए सवाल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर ’10 महीने में 14 बार आपत्ति’ दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार, ”ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने, खुद को अंधेरे में रखने से लेकर नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने को लेकर दर्ज कराईं और ‘अनधिकृत, गैरकानूनी’ कदमों पर सवाल उठाए।”
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?
चुनाव आयोग ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा, ”किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और नजरिए का होना एक सामान्य बात है। अंतिम फैसला लेने से पहले की निर्णय प्रक्रिया में ये शामिल होते हैं। न केवल तीनों आयुक्त, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है।”
रिपोर्ट में क्या दावे किए गए?
- इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज की।
- रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में नए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़ा एक सवाल जोड़ा गया। मई में दोनों आयुक्तों ने कहा था कि कानून में बदलाव किए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद बदलाव किया गया और संधू ने इसे ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताया।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने और अपीलों से जुड़े मामलों में भी दोनों आयुक्तों ने सवाल उठाए।
- जुलाई के अंत में दिल्ली में आयोग के प्रशासनिक विभाग में काम के बंटवारे को लेकर भी दोनों आयुक्तों ने आपत्ति की। उन्होंने कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर इसे आयोग को नियंत्रित करने वाले कानून का ‘स्पष्ट उल्लंघन’ बताया। अगले दिन दोनों ने इस आदेश को रद्द कर दिया।
- रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में 97 मतदाताओं को स्थानीय अधिकारियों ने योग्य पाया, लेकिन केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर में उनके नाम दर्ज नहीं हो सके। दोनों आयुक्तों ने मतदाता सूची तैयार करने में सॉफ्टवेयर के केंद्रीकृत नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए।
13 करोड़ से ज्यादा नाम हटे
भारत चुनाव आयोग (ECI) की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया, जून 2025 में बिहार में शुरू हुई थी। अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जा चुके हैं। हालांकि, जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उन्हें इसके खिलाफ अपील करके अपना जवाब देने का विकल्प दिया गया है।
विपक्ष ने की आलोचना
यह रिपोर्ट आने के बाद राजनीतिक हलकों में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है और कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार गुप्ता को बीजेपी संरक्षण दे रही है, ताकि भारत निर्वाचन आयोग को अंदर से खोखला किया जा सके। वहीं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखी और दावा किया कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले और उसके दौरान उनकी पार्टी ने ‘दोषपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया पर प्रजेंटेशन’ दिया।

