Diwali 2026: हिंदू धर्म में दीवाली का त्योहार सबसे खास माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी सुख-समृद्धि दायिनी मानी जाती हैं। लोग मां की पूजा करके उनसे घर में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। आइए, इस रिपोर्ट में हम जानते हैं कि मां की पूजा किस मुहूर्त में करना है और कौन सा मुहूर्त सबसे शुभ है।
दीवाली पर लक्ष्मी पूजन के 4 शुभ मुहूर्त
- प्रदोष काल मुहूर्त: 8 नवंबर, रविवार को शाम 5 बजकर 13 मिनट से रात 7 बजकर 49 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इस समय मां लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है।
- वृषभ काल मुहूर्त: शाम 5 बजकर 37 मिनट से रात 7 बजकर 34 मिनट तक वृषभ काल रहेगा। इसे स्थिर लग्न भी कहा जाता है। इस दौरान लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है।
- प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन: शाम 5 बजकर 13 मिनट से रात 7 बजकर 49 मिनट तक मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जा सकती है।
- निशीथ काल मुहूर्त: रात्रि 11 बजकर 17 मिनट से 12 बजकर 09 मिनट तक निशीथ काल रहेगा। इस समय भी श्री महालक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है।
दीवाली पर बनने वाले प्रमुख राजयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दीवाली पर बुधादित्य राजयोग और लक्ष्मी नारायण राजयोग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। इन योगों को धन, बुद्धि, सफलता और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
लक्ष्मी पूजन के लाभ
- दीवाली के अवसर पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। मां लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से उनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।
- लक्ष्मी पूजन के साथ भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान और शुभ कार्यों के प्रतीक हैं। लक्ष्मी और गणेश की एक साथ पूजा करने से जीवन में धन के साथ-साथ बुद्धि, विवेक और सकारात्मकता का भी संचार होता है। इससे परिवार में प्रेम, एकता और शांति बनी रहती है।
- व्यापारियों के लिए भी दीवाली का दिन बहुत खास होता है। इस दिन वे अपने बही-खातों और व्यापार से जुड़ी वस्तुओं की पूजा करते हैं तथा आने वाले समय में व्यापार की तरक्की और लाभ की कामना करते हैं। इसे नए कार्यों की शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
- लक्ष्मी पूजन के दौरान घर में दीपक जलाने का भी विशेष महत्व है। दीपों का प्रकाश अंधकार को दूर करने के साथ जीवन में आशा, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है। यह पूजा मन को शांति प्रदान करती है और हमें अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देती है।
लग्न अनुसार लक्ष्मी पूजन का शुभ मूहर्त
- घरेलू व्यापारियों के लिए- शाम 6:09 से रात 08:07 तक( वृषभ लग्न)
- एनआरआई और विदेश व्यापार करने वालों के लिए- रात 12:37 से 2: 49 तक (सिंह लग्न)
मां लक्ष्मी की पूजा की सरल और संपूर्ण विधि क्या है ?
दीवाली पर अमावस्या तिथि और प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।
पूजा के लिए उपयुक्त समय- दीवाली पर शाम को प्रदोष काल में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबरे देव और माता सरस्वती की पूजा करना शुभ होता है। ग्रहस्थों के लिए प्रदोष काल जबकि साधकों, तांत्रिकों और व्यापारियों के लिए निशिता काल में लक्ष्मी पूजा का विधान होता है।
लक्ष्मी जी की आरती:
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
बोलिए लक्ष्मी माता की जय
दीवाली पर लक्ष्मी पूजन का महत्व
- दीवाली के पर्व पर माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश, माता सरस्वती और भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन करना बेहद शुभ होता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का समय होता है, जिसे माता लक्ष्मी की आराधना के लिए उत्तम माना गया है।
- लक्ष्मी पूजन में स्थिर लग्न का भी विशेष महत्व होता है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि के लग्न को स्थिर लग्न कहा जाता है। मान्यता है कि दीवाली की रात अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न के शुभ संयोग में माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली आती है। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ समय में विधि-विधान से पूजा करने पर माता लक्ष्मी अपने भक्तों के घर में निवास करती हैं और उन पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं।
दीवाली लक्ष्मी पूजा-विधि
सबसे पहले दीवाली की शाम को घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल की अच्छी तरह के साफ-सफाई करें फिर इसके फूलों, रंगोली और दीपों से सजाएं। इसके बाद पूजा की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर सबसे पहले पूजा का संकल्प लें और भगवान गणेश को तिलक लगाकर फूल, फूल, दूर्वा और लड्डू अर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी को लाल फूल, कमल, फल, खील, खिलौने, बताशे आदि अर्पित करें। पूजन समाग्री अर्पित करने के बाद घी का दीपक जलाएं और धूप सुगंधित करें। फिर विधि-विधान और मंत्रों के साथ भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद लक्ष्मी और गणेश की आरती करें, फिर पूजा में भूल के लिए क्षमा प्रार्थना मांगे।
दीवाली पूजन तैयारी
पूजा स्थल पर कैसे करें तैयारी
- पूजा के स्थान की अच्छी तरह के साफ-सफाई करें। फिर ईशान कोण में लकड़ी की चौकी रखें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत रखें और गणेश जी और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
- चौकी के पास तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरकर रखें और इसके अंदर एक सिक्का, सुपारी, अक्षत, रोली डाले। फिर कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर दिया रखें।
- इसके बाद हाथ में थोड़ा जल लेकर उसे अपने ऊपर और सभी पूजन सामग्री के ऊपर छिड़काव करें और ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ मंत्र का जाप करें।
- आचमन करने के बाद दाहिने हाथ में अक्षत, फल और जल लेकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना और पूजा का संकल्प लें।
- दीवाली पूजा शुरू करने से पहले सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करें, जिसमें उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा, मिठाई और धूप अर्पित करें।
- मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान शुद्ध देशी घी का एक चौमुखी दीपक और सरसों के तेल का छोटा दीया जलाएं।
- पूजा सामग्री और मंत्रों के जाप के बाद पहले भगवान गणेश की आरती और फिर मां लक्ष्मी की आरती करें। अंत में पूजा में हुई जाने-अनजाने में हुई भूल चूक के लिए क्षमा याचना मांगे।
दीवाली से जुड़े खास नियम
- उत्तर दिशा में पूजा- माना जाता है कि उत्तर दिशा धन की दिशा होती है और मां लक्ष्मी जिनकी पूजा दीवाली के दिन होती है, धन की देवी मानी गई हैं इसीलिए दीवाली की पूजा उत्तर दिशा या फिर उत्तर-पूर्व दिशा में ही करनी चाहिए। इसके मुताबिक पूजा करने वाले का मुख घर की उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
- हर बार बदले मूर्तियां- हर साल दीवाली पूजन में इस्तेमाल की जाने वाली लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां नई होनी चाहिए। पुरानी मूर्तियों को इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए, लेकिन अगर आपके पास चांदी की मूर्तियां हैं तो दोबारा उन्हें गंगाजल से साफ करके इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
- लाल रंग का इस्तेमाल- कहते हैं देवी को लाल रंग अति प्रिय होता है इसीलिए दीवाली की पूजा में लाल रंग की वस्तुओं का इस्तेमाल विशेष तौर से करना चाहिए, जैसे इस दिन पूजा के दौरान देवी को लाल रंग के कपड़े, लाल रंग के फूल, लाल श्रृंगार अर्पित करें। इससे मां को प्रसन्न किया जा सकता है।
- रोली से बनाएं स्वास्तिक- पूजा घर में दोनों तरफ रोली से स्वास्तिक का निर्माण करना भी शुभ माना जाता है। कहते हैं स्वास्तिक भगवान गणेश का ही स्वरूप होता है। जो अत्यंत शुभ फल देने वाला माना गया है ,इससे घर में मौजूद तमाम तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
दीवाली में कैसे पाएं सुख, शांति समृद्धि
- मां लक्ष्मी ऐश्वर्य व वैभव की देवी हैं, इसीलिए दीपावली के दिन इनकी पूजा से भौतिक सुखों की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही घर में भरपूर खुशियां आती हैं। वहीं दीवाली पूजन में अगर कुछ बातों का भी खास ध्यान रखा जाए तो विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है ।
- धार्मिक मान्यताओं में आम के पेड़ को दैवीय वृक्ष माना जाता है और आम के पेड़ की लकड़ी और पत्तों का प्रयोग सभी प्रकार के धार्मिक कार्यों की शुरुआत करने से पहले किया जाता है। दीपावली पर भी आपको घर के मुख्य द्वार और पूजाघर के मुख्य द्वार पर गेंदे के फूल और आम के पत्तों से बना तोरण लगाना चाहिए। ऐसा करना धार्मिक दृष्टि तो शुभ माना ही जाता है, बल्कि वास्तु के अनुसार भी यह सकारात्मक उर्जा को आकर्षित करता है।
- धर्म से जुड़ा कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने से पहले स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है। इसका महत्व बहुत खास माना जाता है। दीवाली के दिन पूजाघर की दीवारों पर सिंदूर से स्वास्तिक चिह्न बनाएं इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह देवी लक्ष्मी को आकर्षित करता है और घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है।

