Barapullah Phase-3 Inaugurated in Delhi: दिल्ली में लंबे इंतजार के बाद बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर अब आम लोगों के लिए खुल गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का उद्घाटन किया। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा भी मौजूद रहे। कॉरिडोर के शुरू होने से पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां और आगे दक्षिण दिल्ली की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
मयूर विहार से सराय काले खां तक कनेक्टिविटी
बारापुला फेज-3 का निर्माण सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 तक बारापुला नाले के ऊपर एलिवेटेड रोड के रूप में किया गया है। परियोजना का उद्देश्य पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच सीधी और सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह कॉरिडोर मौजूदा बारापुला नेटवर्क से जुड़ता है और मयूर विहार की तरफ से आने वाले वाहन सराय काले खां के रास्ते दक्षिण दिल्ली की ओर जा सकेंगे। परियोजना से सराय काले खां, रिंग रोड, DND फ्लाईवे और NH-24 जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद जताई गई है।
#WATCH | Delhi: Union Home Minister Amit Shah inaugurates the Barapullah Phase-3 corridor in Delhi today. This corridor will provide connectivity between East Delhi and South Delhi. https://t.co/HQ20fRNPCX
— ANI (@ANI) September 29, 2026
नोएडा और दक्षिण दिल्ली के यात्रियों को फायदा
बारापुला फेज-3 को खास तौर पर पूर्वी दिल्ली और नोएडा से दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मयूर विहार से AIIMS की दिशा में सफर का समय करीब 15 मिनट तक हो सकता है। नए कॉरिडोर से वाहन चालकों को कई सिग्नलों से बचते हुए आगे बढ़ने का रास्ता मिलेगा। इससे उन प्रमुख सड़कों पर भी दबाव कम करने का लक्ष्य है जहां लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या रही है।
2014 में मंजूरी, 2015 में शुरू हुआ निर्माण
बारापुला फेज-3 परियोजना की प्रशासनिक मंजूरी दिसंबर 2014 में दी गई थी और निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ। इसे शुरुआती तौर पर 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन जमीन अधिग्रहण, पेड़ काटने की अनुमति, यमुना क्षेत्र में निर्माण से जुड़ी चुनौतियों, कोविड-19 महामारी और अन्य कारणों से परियोजना में लगातार देरी हुई। दिल्ली सरकार के पुराने रिकॉर्ड में भी परियोजना की शुरुआती स्वीकृत लागत करीब ₹1,260.63 करोड़ दर्ज है। बाद में देरी और अन्य कारणों से संशोधित लागत बढ़कर करीब ₹1,635.03 करोड़ हो गई।
एक दशक की देरी के बाद पूरा हुआ प्रोजेक्ट
परियोजना को कई बार नई समयसीमा दी गई। जनवरी 2026 में PWD ने अतिरिक्त समय और संशोधित लागत की जानकारी दी थी। बाद में जून 2026 को निर्धारित अंतिम समयसीमा भी पूरी नहीं हो सकी और जुलाई में अधिकारियों ने बताया कि मुख्य निर्माण पूरा हो चुका है तथा कुछ फिनिशिंग कार्य बाकी हैं। इस परियोजना में देरी और लागत बढ़ने को लेकर दिल्ली में प्रशासनिक जांच भी हुई है। दिल्ली के उपराज्यपाल के निर्देश के बाद एंटी करप्शन ब्रांच ने परियोजना में देरी, लागत बढ़ने और आर्बिट्रेशन भुगतान से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोपों की जांच जारी रही है।
साइकिल और पैदल यात्रियों के लिए प्रावधान
परियोजना में वाहन यातायात के साथ-साथ पैदल और साइकिल से आने-जाने वालों के लिए भी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। कॉरिडोर के यमुना पार हिस्से में विशेष संरचनात्मक डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य केवल वाहनों की आवाजाही को तेज करना ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना भी है। उद्घाटन के मद्देनजर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सराय काले खां, महारानी बाग और आश्रम चौक के आसपास यातायात को लेकर एडवाइजरी भी जारी की थी। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की जानकारी दी गई थी।

