फरीदाबाद. तेज गुस्सा सिर्फ हमारे व्यवहार और मन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसका सीधा असर शरीर और दिल पर भी पड़ सकता है. गुस्सा आने पर शरीर कुछ समय के लिए ऐसी स्थिति में चला जाता है, जैसे वह किसी खतरे का सामना करने या उससे बचने की तैयारी कर रहा हो. इससे दिल की धड़कन तेज होने के साथ रक्तचाप बढ़ सकता है और शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं. इस बारे में फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में कार्यरत कार्डियोलॉजिस्ट और प्रोफेसर डॉ. गौतम सिंघल ने लोकल 18 से बात की. आइये उनसे जानते हैं कि गुस्से के दौरान शरीर में क्या होता है और किन परिस्थितियों में यह दिल के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है.
2 हार्मोन हो जाते हैं सक्रिय
डॉ. गौतम कहते हैं कि गुस्सा एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है. जब व्यक्ति किसी खतरे या तनाव की स्थिति में होता है तो शरीर एक तरह के ‘फाइट या फ्लाइट’ यानी मुकाबला करने या वहां से बचकर निकलने वाले मोड में चला जाता है. गुस्सा भी शरीर की ऐसी ही प्रतिक्रिया है. इस दौरान शरीर में एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे हार्मोन सक्रिय होकर अधिक मात्रा में निकलने लगते हैं. इन हार्मोन की वजह से दिल की धड़कन तेज हो जाती है. रक्तचाप को बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाओं में संकुचन हो सकता है और मांसपेशियों तक ज्यादा रक्त पहुंचने लगता है. इससे शरीर खुद को किसी खतरे का सामना करने या उससे बचने के लिए तैयार करता है.
डॉ. गौतम के मुताबिक गुस्सा कुछ मिनट का हो और व्यक्ति बाद में शांत भी हो जाए, तब भी इसका असर तुरंत पूरी तरह खत्म नहीं होता. गुस्से के दौरान रक्त वाहिकाओं में जो संकुचन होता है, उसका प्रभाव करीब 40 से 70 मिनट तक रह सकता है. डॉ. गौतम कहते हैं कि हर बार गुस्सा आने से हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन बहुत ज्यादा गुस्सा आने पर हार्ट अटैक की संभावना बढ़ सकती है. INTERHEART अध्ययन में हार्ट अटैक के जोखिम से जुड़े कई कारकों का अध्ययन किया गया. इसके एक उप-अध्ययन में यह देखा गया कि कुछ लोगों में हार्ट अटैक आने से पहले के एक घंटे के दौरान उन्हें बहुत ज्यादा गुस्सा आया था या अपनी क्षमता के मुताबिक बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत की थी.
डॉ. गौतम ने बताया कि बहुत ज्यादा गुस्सा आने से कुछ परिस्थितियों में हार्ट अटैक का खतरा करीब ढाई गुना तक बढ़ सकता है. गुस्से का असर कुछ लोगों में करीब एक घंटे और कभी-कभी इससे ज्यादा समय तक रह सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार गुस्सा आने पर हार्ट अटैक होगा. गुस्सा पहले से हृदय रोग, ब्लड प्रेशर या शुगर जैसी समस्याओं वाले लोगों में ज्यादा जोखिम पैदा कर सकता है.
किन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक
डॉ. गौतम के मुताबिक गुस्सा हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक है, लेकिन जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी है, जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका है, ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की समस्या है, सांस फूलने की दिक्कत रहती है या पैरों की नसों में रुकावट है, उनमें जोखिम ज्यादा हो सकता है. परिवार में पहले किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक की समस्या रही हो, तब भी व्यक्ति को अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा सावधान रहना चाहिए. हर व्यक्ति के शरीर की बनावट और गुस्से पर शरीर की प्रतिक्रिया अलग होती है. इसलिए हर व्यक्ति को गुस्सा आने पर हार्ट अटैक होगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता. कई अध्ययनों में ऐसे लोग भी सामने आए हैं, जिन्हें पहले कोई हृदय संबंधी समस्या नहीं थी, लेकिन तेज गुस्से के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया.
कब अस्पताल जाएं
डॉ. गौतम कहते हैं कि गुस्सा आने पर कुछ लोगों में शरीर की प्रतिक्रिया बहुत ज्यादा हो सकती है. किसी व्यक्ति की आवाज सामान्य रह सकती है, जबकि किसी दूसरे व्यक्ति का चेहरा लाल पड़ सकता है, हाथ-पैर कांप सकते हैं या सांस फूल सकती है. ऐसी कुछ परेशानियां गुस्से की सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन यही लक्षण हार्ट अटैक में भी दिखाई दे सकते हैं. अगर गुस्सा शांत होने के बाद भी सीने में भारीपन, पसीना, सांस फूलना या बेचैनी जैसे लक्षण करीब 5 मिनट तक ठीक नहीं होते, सामान्य नहीं होते या लगातार बढ़ रहे होते हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाकर जांच करवानी चाहिए, क्योंकि यह हार्ट अटैक का संकेत भी हो सकता है.