IndiGo Stays Away from Fuel Price Hedging: त्योहारों के सीजन में हवाई सफर करने की योजना बना रहे यात्रियों को महंगे टिकटों का झटका लग सकता है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने फिलहाल विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए फ्यूल हेजिंग का विकल्प नहीं चुना है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने का असर एयरलाइन की परिचालन लागत और आगे चलकर हवाई किरायों पर पड़ सकता है। इंडिगो के CEO विली वॉल्श ने साफ किया है कि एयरलाइन फिलहाल हेजिंग नहीं कर रही है और व्यापक समीक्षा पूरी होने तक इसकी योजना भी नहीं है।
इंडिगो ने क्यों बनाई हेजिंग से दूरी?
विली वॉल्श के मुताबिक फ्यूल हेजिंग एक मुश्किल फैसला है। इसका उद्देश्य ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से एयरलाइन को वित्तीय सुरक्षा देना है। वॉल्श ने बताया कि भारतीय घरेलू विमानन बाजार में फिलहाल कोई भी एयरलाइन अपने ईंधन की कीमतों को हेज नहीं कर रही है। ऐसे में अगर IndiGo अकेले हेजिंग का रास्ता अपनाती है, तो प्रतिस्पर्धियों की तुलना में उसके लिए अलग तरह का वित्तीय जोखिम पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन के बोर्ड में इस विषय पर चर्चा हुई है और विस्तृत समीक्षा के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। फिलहाल IndiGo हेजिंग नहीं कर रही है।
क्या है फ्यूल हेजिंग और क्या असर पड़ता है?
फ्यूल हेजिंग एक वित्तीय व्यवस्था है, जिसके जरिए एयरलाइन भविष्य में इस्तेमाल होने वाले विमान ईंधन की कीमत पहले से तय या सीमित कर सकती है। इसके लिए कंपनियां फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट का इस्तेमाल करती हैं। इसे आसान भाषा में समझें तो मान लीजिए किसी एयरलाइन को अगले तीन महीने में बड़ी मात्रा में विमान ईंधन खरीदना है। उसे आशंका है कि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन महंगा हो सकता है। ऐसे में वह हेजिंग के जरिए पहले से एक निश्चित कीमत या अधिकतम मूल्य तय करने की कोशिश कर सकती है। इससे ईंधन की कीमत अचानक बढ़ने पर एयरलाइन को कुछ राहत मिलती है। हालांकि अगर बाजार में कीमतें गिर जाती हैं, तो हेजिंग के कारण एयरलाइन को कम कीमत का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
विमान ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ रही लागत
विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की बड़ी हिस्सेदारी होती है। इंडिगो के CEO के मुताबिक कंपनी की कुल लागत में ईंधन का हिस्सा 40 फीसदी से अधिक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के पीछे केवल कच्चे तेल की कीमतें जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि रिफाइनिंग मार्जिन यानी क्रैक स्प्रेड में भी असामान्य बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक 2000 से 2025 के बीच ATF का औसत क्रैक स्प्रेड करीब 22 फीसदी था, जबकि मौजूदा परिस्थितियों में यह बढ़कर लगभग 65 फीसदी हो गया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने से जेट फ्यूल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। वॉल्श को उम्मीद है कि वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता में सुधार के साथ आने वाले समय में स्थिति सामान्य हो सकती है।

