रोहतक: नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित विश्व के सबसे बड़े थिएटर फेस्टिवल भारत रंग महोत्सव (भारंगम) के 25वें संस्करण के तहत इस वर्ष दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) को चार नाटकों की मेजबानी का अवसर मिला है। चार दिवसीय इस नाट्य उत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को ‘सांदल बार’ नाटक का प्रभावशाली मंचन किया गया।
पंजाब के अमृतसर से आए मंच रंगमंच समूह के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत यह नाटक इतिहास के पन्नों में दबी एक दर्दनाक कहानी को सामने लाता है। नाटक ने पहचान, अपनापन और मानवीय मूल्यों जैसे समकालीन सवालों को गहराई से उठाया। पंजाबी भाषा में मंचित होने के बावजूद भाषा कहीं भी बाधा नहीं बनी, बल्कि कलाकारों के सशक्त अभिनय और भावनात्मक प्रस्तुति ने दर्शकों को पूरी तरह से बांधे रखा।
करीब 1 घंटा 25 मिनट की अवधि वाले इस नाटक का लेखन डॉ. हरजीत सिंह ने किया है, जबकि निर्देशन केवल धालीवाल ने किया। ‘सांदल बार’ उन मूल निवासियों की त्रासदी की कहानी है, जिन्हें ब्रिटिश शासन ने अपने समर्थकों को जमीन देने के लिए उनके घरों और इलाकों से बेदखल कर दिया था। पीढ़ियों से नदियों के किनारे शांतिपूर्वक जीवन जीने वाले इन लोगों से यह कहकर जमीन छीन ली गई कि उनके पास मालिकाना हक का कोई लिखित प्रमाण नहीं है।
नाटक में अविभाजित पंजाब के सांदल वन, रावी नदी और धान के खेतों से घिरे उस उपजाऊ क्षेत्र को दिखाया गया है, जहां घने जंगलों में आदिवासी समुदाय निवास करता था। ये लोग पशुपालन पर निर्भर थे और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीते थे। जंगलों में रहने के कारण उन्हें ‘जंगली’ कहा गया, जबकि इतिहास बताता है कि उनके पूर्वजों ने सिकंदर की सेनाओं से भी संघर्ष किया था। इन समुदायों में किसी तरह का धार्मिक कट्टरपन नहीं था और सभी धार्मिक परंपराओं को समान दृष्टि से देखा जाता था।
नाटक यह भी दर्शाता है कि किस तरह औपनिवेशिक नीतियों के चलते सदियों पुरानी जीवन-शैली, जंगल, नदियां और जमीन उनसे हमेशा के लिए छीन ली गई। ‘सांदल बार’ के मूल निवासियों की यह पीड़ा आज के समय में भी अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति की झलक देती है। जब सत्ता सदियों से बसे लोगों से जमीन का सबूत मांगती है, तो यह कहानी सिर्फ अतीत की नहीं, बल्कि वर्तमान की भी प्रतीत होती है। नाटक सभ्यता और औद्योगीकरण के नाम पर प्रकृति और मानव जीवन के साथ हुए अन्याय पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस नाटक में केवल धालीवाल, हरप्रीत सिंह, युवनिश शर्मा, गुरदीत पाल सिंह, निशान सिंह, जसवंत सिंह, इमैनुएल सिंह, कुशाग्र कालिया, शिवम, आकाशदीप, राजा, हर्षित, हरमीत सिंह, जुझार सिंह, परमवीर सिंह, नवजीत कौर, गुरलीन कौर, आकाशदीप सिंह, जसवीन कौर, जॉय शर्मा और गुरविंदर सिंह ने सशक्त अभिनय किया।
कार्यक्रम के दौरान अभिनेता जतिन सरना, मंडलायुक्त राजीव रत्न, एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट अमित दुबे, गुलशन भाटिया और डीएलसीसुपवा के वाइस चांसलर डॉ. अमित आर्य सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
