फौजी जीवन मेहर सिंह की रचनाशील प्रतिभा का केंद्र बन गया। फौज में विभिन्न स्थानों पर पोस्टेड रहते हुए, वे दिल्ली, रंगून और अन्य शहरों में अपनी रागनियां गाते रहे। यहां तक कि माचिस की डिब्बी पर भी उन्होंने रागनियां गाई हैं। फौजी जीवन की कठोरता और अलगथलग रहने की पीड़ा ने उनकी कृतियों को गहरा बनाया।
उनकी एक प्रसिद्ध रागनी उनकी छुट्टी के दिनों की पीड़ा को व्यक्त करती है:
“छुट्टी के दिन पूरे होगे, फिकर करन लगा मन में।
बांध बिस्तरा चाल पड़ा, के बाकि रहगी तन में।।”
मेहर सिंह की लेखनी पर फौजी जीवन का इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उन्होंने फौजी जीवन को ही आधार बनाकर अनेक रचनाएं कीं। हालांकि, उनकी रागनियां केवल फौजी जीवन तक सीमित नहीं थीं। किसान जीवन, पारस्परिक प्रेम, विरह, सुख-दुख, सामाजिक समस्याएं—सभी विषयों पर उन्होंने खूब लिखा। हरियाणा के अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में भी उनकी रागनियां लोकप्रिय रहीं।
मेहर सिंह को “ड्रीम पोएट” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी अधिकतर रचनाएं सपनों में देखी हुई घटनाओं को आधार बनाकर लिखीं। उनकी कुछ रागनियां वर्तमान समय में भी गायक दिलेर खरकिया की आवाज में गाई जाती हैं, जैसे ‘सपना’ और ‘अपना’।
