
- ‘शताब्दी-यात्रा भारत के विधायी संस्थानों की 100 वर्षों की यात्रा का प्रतिबिंब है’- गुप्ता
- डीयू लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान विद्यार्थी दिल्ली विधानसभा के स्टॉल पर क्यूआर कोड स्कैन कर स्मारक कॉफी टेबल बुक की कर रहे है प्री-बुकिंग
Delhi News | द भारत ख़बर नेटवर्क । नई दिल्ली । विट्ठलभाई पटेल न केवल केंद्रीय विधानसभा की अध्यक्षता करने वाले पहले भारतीय थे, बल्कि वे इसकी गरिमा और स्वतंत्रता के संरक्षक भी थे। ‘शताब्दी-यात्रा: विट्ठलभाई की गौरव गाथा’ उनके साहस, संवैधानिक दूरदर्शिता और संसदीय स्वायत्तता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को एक श्रद्धांजलि है।
हमारा प्रयास है कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे” यह विचार दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा 12 से 14 फरवरी 2026 तक स्पोर्ट्स मल्टीपर्पस हॉल में आयोजित ‘डीयू लिटरेचर फेस्टिवल’ में विधानसभा के बुक स्टॉल का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए।
विधानसभा के इस स्टॉल पर छात्रों, संकाय सदस्यों और आगंतुकों की भारी भीड़ देखी गई, जिन्होंने गहरी उत्सुकता और उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अनेक युवाओं ने विट्ठलभाई पटेल के जीवन, उनके योगदान, संसदीय परंपराओं के विकास और इस स्मारक पुस्तक के शोध से संबंधित विचारोत्तेजक प्रश्न पूछे।
आगंतुकों की सुविधा के लिए एक समर्पित क्यूआर कोड उपलब्ध कराया गया, जिसके माध्यम से कॉफी टेबल बुक की प्री-बुकिंग की जा रही है, जिससे इसके प्रति लोगों का रुझान दुख रहा है।
युवाओं को विरासत से जोड़ने के लिए स्टॉल पर सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया

युवाओं को भारत की संसदीय विरासत से जोड़ने के लिए स्टॉल पर एक विशेष ‘सेल्फी पॉइंट’ भी बनाया गया है, जो छात्रों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, विट्ठलभाई पटेल के जीवन और विरासत पर आधारित एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री), जिसे प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने अपनी आवाज दी है, स्टॉल पर प्रदर्शित की जा रही है।
इस डॉक्यूमेंट्री ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया और उनके अनुभव को और समृद्ध बनाया। गुप्ता ने आगंतुकों की भारी रुचि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस उत्सव में कॉफी टेबल बुक को मिल रही असाधारण प्रतिक्रिया युवाओं के बीच भारत के संसदीय इतिहास को जानने के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाती है।
‘शताब्दी-यात्रा’ कॉफी टेबल बुक एक सूक्ष्मता से तैयार किया गया संकलन है, जो 1925 से 2025 तक भारत के संसदीय विकास के 100 वर्षों और भारत के पहले निर्वाचित अध्यक्ष वीर विट्ठलभाई पटेल जी की स्थायी विरासत को संजोए हुए है।
दुर्लभ तस्वीरों, अभिलेखीय सामग्री और शोध-आधारित वृत्तांतों से भरपूर यह पुस्तक पिछले एक दशक में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की मजबूती और महत्वपूर्ण संस्थागत मील के पत्थरों का वर्णन करती है। अध्यक्ष ने अंत में कहा कि शैक्षणिक और साहित्यिक मंचों पर दिल्ली विधानसभा की यह भागीदारी संवैधानिक जागरूकता को बढ़ावा देने और युवा नागरिकों को विधायी लोकतंत्र के इतिहास, मूल्यों और जिम्मेदारियों से फिर से जोड़ने की हमारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
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