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    Editorial Aaj Samaaj Bangladesh once again hears the rumblings of extremism

    अंकित कुमारBy अंकित कुमारDecember 19, 2025No Comments6 Mins Read
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    Editorial Aaj Samaaj
    Editorial Aaj Samaaj: बांग्लादेश फिर कट्टरपंथ की आहट

    Editorial Aaj Samaaj | राकेश सिंह | बांग्लादेश, वो पड़ोसी देश जो कभी भारत की मदद से आजाद हुआ था, आजकल फिर से सुर्खियों में है। इस बार वजह खुशी की नहीं, बल्कि चिंता की है। दिसंबर 2025 में ढाका की सड़कों पर फिर से प्रदर्शन शुरू हो गए। लोग आगजनी कर रहे हैं, स्लोगन लगा रहे हैं और सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। इस बवाल का केंद्र है शरीफ ओस्मान हादी की मौत। हादी इंकलाब मंच के एक प्रमुख नेता थे, जो पिछले साल के छात्र आंदोलन में बड़े रोल में थे। उनकी मौत ने पूरे देश को हिला दिया है। सवाल ये है कि इसके पीछे क्या कारण हैं? कौन लोग इसमें शामिल हैं? सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या बांग्लादेश अब कट्टरपंथी ताकतों के हाथ में चला जाएगा? चलिए, इस पूरी कहानी को आम भाषा में समझते हैं।

    राकेश सिंह, प्रबंध संपादक, आईटीवी नेटवर्क।

    बांग्लादेश की राजनीति हमेशा से उथल-पुथल वाली रही है। 1971 में भारत की मदद से पाकिस्तान से आजादी मिली, लेकिन उसके बाद से यहां सत्ता के लिए खींचतान चलती रही। शेख हसीना की अवामी लीग सरकार लंबे समय तक चली, लेकिन 2024 में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन हुआ। ये आंदोलन नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ, लेकिन सरकार विरोधी बन गया। लाखों लोग सड़कों पर उतर आए, हिंसा हुई और आखिरकार हसीना को देश से भागना पड़ा। उसके बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी, जो चुनाव कराने की तैयारी में है। फरवरी 2026 में चुनाव होने हैं। इसी बीच अवामी लीग को बैन किया गया, जो हसीना की पार्टी थी। ये बैन मई में हुआ। इसके खिलाफ भी काफी हंगामा हुआ।

    12 दिसंबर 2025 को ढाका के बिजयनगर इलाके में शरीफ ओस्मान हादी पर हमला हुआ। उन्हें गोली मारी गई और वे गंभीर हालत में सिंगापुर ले जाए गए। 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। हादी इंकलाब मंच के कन्वीनर थे और 2024 के जुलाई अपराइजिंग के बड़े चेहरे। इंकलाब मंच खुद को रिवोल्यूशनरी कल्चरल प्लेटफॉर्म कहता है, जो आंदोलन की स्पिरिट से निकला है। हादी अवामी लीग और भारत के खिलाफ खुलकर बोलते थे। उनकी मौत की खबर फैलते ही ढाका में प्रदर्शन शुरू हो गए। लोग शाहबाग में जमा हुए, स्लोगन लगाए जैसे डिल्ली ना ढाका, ढाका ढाका और लीग धोरो, जेल भोरो। यानी अवामी लीग वालों को पकड़ो और जेल में डालो। कुछ जगहों पर भारत विरोधी नारे भी लगे, जैसे डेमोलिश इंडियन एग्रेशन!

    प्रदर्शन इतने उग्र हुए कि लोगों ने अवामी लीग के ऑफिस पर आग लगा दी, राजशाही में शेख मुजीबुर रहमान का घर जला दिया, जो हसीना के पिता थे। मीडिया हाउस जैसे प्रोथोम आलो और डेली स्टार पर भी हमले हुए। संपादकों को पीटा गया, इमारतों में आग लगाई गई। अंतरिम सरकार ने सुरक्षा बढ़ा दी, लेकिन आग बुझ नहीं रही। यूनुस ने शांति की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी कह रहे कि हादी की मौत एक साजिश है, जो चुनाव को पटरी से उतारने के लिए की गई। इसके पीछे कौन है? यहां पर दो बड़े नाम आते हैं। जमात-ए-इस्लामी और इंकलाब मंच। जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश की एक पुरानी इस्लामिस्ट पार्टी है, जो 1971 में पाकिस्तान के साथ थी और आजादी के खिलाफ। हसीना सरकार ने इसे 2018 में बैन किया था, लेकिन 2024 के आंदोलन के बाद ये फिर से सक्रिय हो गई।

    जमात के अमीर शफीकुर रहमान ने अवामी लीग को बैन करने की मांग की थी, और अब वे प्रदर्शनों में शामिल हैं। उनका छात्र विंग, बांग्लादेश इस्लामी छत्र शिबिर, सड़कों पर उतरा है। वे कहते हैं कि अवामी लीग को पूरी तरह खत्म करो और भारत के खिलाफ भी बोलते हैं। जैसे, एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर अब्दुल्लाहिल अमान आजमी, जो जमात से जुड़े हैं, ने कहा कि बांग्लादेश में शांति तभी आएगी जब भारत टूट जाएगा। ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इंकलाब मंच थोड़ा नया है। ये 2024 के आंदोलन से निकला ग्रुप है, जो खुद को क्रांतिकारी कहता है। हादी इसके चेहरे थे, जो अवामी लीग को फासिस्ट कहते थे और भारत को आक्रामक बताते थे। वे कहते थे कि अवामी लीग भारत की कठपुतली है, और उसे बैन करो। मंच ने अवामी लीग के टेररिस्ट को पकड़ने की मुहिम चलाई थी। अब हादी की मौत के बाद, मंच के लोग और जमात मिलकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि ये हमला आंतरिक साजिश हो सकती है, जिसमें जमात को फायदा हो। क्योंकि हादी का ग्रुप युवाओं को आकर्षित कर रहा था, जो जमात की राह में रुकावट था।

    ये एंटी अवामी और एंटी भारत सेंटिमेंट क्यों? अवामी लीग को लोग हसीना की तानाशाही से जोड़ते हैं। आंदोलन में सैकड़ों लोग मारे गए और अवामी लीग को जिम्मेदार ठहराया जाता है। भारत के खिलाफ इसलिए क्योंकि हसीना भारत की करीबी थीं। प्रदर्शनकारी कहते हैं कि भारत ने आंदोलन को दबाने में मदद की, और अब भी अवामी लीग को सपोर्ट कर रहा है। हिंदुओं पर हमले भी इसी से जुड़े हैं। 2024 के बाद हिंदुओं पर कई अटैक हुए, मंदिर तोड़े गए, क्योंकि उन्हें अवामी लीग समर्थक माना जाता है। ओएचसीएचआर की रिपोर्ट कहती है कि ये हमले धार्मिक भेदभाव, बदला, और जमीन विवाद से हैं। जमात जैसे ग्रुप एंटी हिंदू रेटोरिक फैलाते हैं, भारत को दोष देते हैं।

    अब सवाल ये है कि क्या बांग्लादेश कट्टरपंथियों के हाथ में चला जाएगा? खतरा तो है। जमात जैसी पार्टियां शरिया बेस्ड स्टेट चाहती हैं। वे चुनाव में हिस्सा लेना चाहते हैं, और भारत विरोधी सेंटिमेंट से वोट बटोरना चाहते हैं। गाजा मुद्दे पर भी वे कंजर्वेटिव्स को मोबिलाइज करते हैं। लेकिन पूरा देश कट्टरपंथी नहीं है। छात्र आंदोलन सेकुलर था, और यूनुस सरकार सुधारों की बात करती है। लेकिन अगर चुनाव में जमात मजबूत हुई, तो हालात बदल सकते हैं। भारत के लिए चिंता ये है कि बॉर्डर पर अशांति बढ़ेगी, और पूर्वोत्तर राज्यों में असर पड़ेगा। कुछ लोग तो भारत को तोड़ने की बात कर रहे हैं, जैसे आजमी ने। लेकिन ये सपने हैं, हकीकत नहीं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भारत पर निर्भर है

    कुल मिलाकर, ये बवाल राजनीतिक है, लेकिन इसमें कट्टरवाद की मिलावट है। अब तक यूनुस सरकार पूरी तरह से फेल साबित हुई है ये हाल रहा तो चुनाव से पहले और हिंसा हो सकती है। बांग्लादेश के लोगों को सोचना चाहिए, आजादी भारत की मदद से मिली, लेकिन अब दुश्मनी क्यों? शांति से ही विकास होगा। भारत को भी सतर्क रहना चाहिए, डिप्लोमेसी बढ़ानी चाहिए। उम्मीद है, ये तूफान जल्दी थमेगा, और बांग्लादेश फिर से स्थिर होगा। लेकिन फिलहाल, सड़कों पर आग है, और दिलों में गुस्सा। (लेखक आईटीवी नेटवर्क के प्रबंध संपादक हैं।)

    यह भी पढ़ें : Editorial Aaj Samaaj: बाबरी मस्जिद विध्वंस के 33 वर्ष बाद

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    अंकित कुमार

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