Editorial Aaj Samaaj | राजीव रंजन तिवारी | न जाने क्यों इस जमाने में प्यार की परिभाषा बदलती जा रही है। कुछ लोग तकरार में प्यार ढूंढ रहे हैं। शायद, यह कतई संभव नहीं है। प्यार पाने और प्यार करने के लिए अकड़ छोड़नी होगी। विनम्र बनना होगा। यह मुझे इसलिए कहना पड़ रहा है कि समाज का एक बड़ा वर्ग लगातार रार और तकरार के अंधेरे में प्यार की रोशनी तलाश रहा है। उदाहरण के तौर पर उत्तराखंड के कोटद्वार वाले मामले की बारीकी पर दृष्टिपात किया जा सकता है। यहां मुस्लिम दुकानदार को बचाने आए युवक दीपक कश्यप (Deepak Kashyap) के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। उनके खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया। वहीं, दीपक कश्यप का कहना है कि वे नफरत के आगे नहीं झुकेंगे। भाई दीपक, क्यों नहीं झुकेंगे। यदि आपके झुकने से समाज में मोहब्बत का पैगाम पहुंचने लगे तो आपको झुकने में क्या दिक्कत है?

पहले मामला समझिए। उत्तराखंड में पौड़ी जिले के कोटद्वार कस्बे में एक मुस्लिम व्यक्ति की कपड़े की दुकान के नाम पर हिन्दू संगठन के कुछ युवकों ने आपत्ति जताई, नाम बदलने का दबाव बनाया लेकिन मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आए स्थानीय लोगों ने जब इसका विरोध किया तो इस मामले ने तूल पकड़ लिया। घटना की शुरुआत 26 जनवरी को हुई। कोटद्वार कस्बे में पिछले तीस साल से बाबा स्कूल ड्रेस नाम से कपड़ों की दुकान चलाने वाले वकील अहमद की दुकान पर बजरंग दल के कुछ लोग आए और 75 वर्षीय वकील अहमद से दुकान के नाम से बाबा शब्द हटाने का दबाव बनाने लगे। इसी दौरान कोटद्वार कस्बे में ही एक जिम चलाने वाले दीपक कुमार कश्यप वकील अहमद के समर्थन में खड़े हो गए। उस वक्त तो पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाल लिया लेकिन 31 जनवरी को हालात तब बिगड़ गए जब दीपक कश्यप के खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
पौड़ी जिले के एसएसपी सर्वेश पंवार ने घटना के बारे में बताया कि कोटद्वार में दुकान के नाम को लेकर 26 जनवरी को कुछ विवाद हुआ था। उसके बाद कुछ लोग देहरादून से आए थे। उस दिन मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में जिस युवक ने विरोध जताया था, उसके विरोध में ये लोग पहुंचे थे। पुलिस ने मामले में खुद संज्ञान लेते हुए देहरादून से आए कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। क्योंकि इन्होंने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी। इसके अलावा बाबा गारमेंट्स के दुकानदार की शिकायत पर भी एक मुकदमा दर्ज किया गया। लेकिन बीते दिनों पुलिस ने इस मामले में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की शिकायत पर वकील अहमद का बचाव करने वाले जिम संचालक दीपक कश्यप और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली। अब दीपक कश्यप और उनके साथी के खिलाफ दर्ज एफआईआर का विरोध हो रहा है। इसे लेकर दूसरे पक्ष में आक्रोश है। उत्तराखंड इंसानियत मंच और कुछ अन्य सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों ने इसका विरोध किया और इस बारे में उत्तराखंड के डीआईजी (लॉ एंड ऑर्डर) धीरेंद्र गुंज्याल से मुलाकात कर मुकदमा वापसी की मांग की है।
मंच के संयोजक डॉक्टर रवि चोपड़ा ने बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज मुकदमा पूरी तरह से झूठा है। उनका कहना था कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। दीपक ने जो काम किया, वह भाईचारे को बढ़ाता है और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है। उसके खिलाफ मुकदमा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल, इस मामले में घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें वकील अहमद को बचाते हुए जब दीपक कुमार से बजरंग दल के लोगों ने पूछा कि तुम कौन हो? इस पर दीपक कुमार ने जवाब दिया कि मेरा नाम मोहम्मद दीपक है। वायरल वीडियो में दीपक और उनके साथी वकील अहमद के बचाव में ये कहते हुए सुने जा सकते हैं कि इनकी दुकान तीस साल से यहां है और दुकान का यही नाम है। आपके कहने से क्या नाम बदल देंगे? दरअसल, बजरंग दल के सदस्यों को इस बात पर आपत्ति थी कि मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी दुकान का नाम बाबा स्कूल ड्रेस क्यों रखा है? उन्हें इस नाम से इसलिए आपत्ति थी क्योंकि यह नाम कोटद्वार के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर सिद्धबली बाबा के नाम से मिलता-जुलता है और यह भ्रम पैदा कर सकता है।
यह मामला तब और सुर्खियों में आया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर दीपक कश्यप की तारीफ करते हुए लिखा कि उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं। दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं, उस संविधान के लिए जिसे बीजेपी और संघ परिवार रोज रौंदने की साजिश कर रहे हैं। वे नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान का जीवंत प्रतीक हैं। पुलिस और प्रशासन स्थिति को संभालने का दावा भले ही कर रहे हैं लेकिन दीपक कश्यप ने प्रशासन पर एकतरफा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में दीपक कश्यप कहते हैं कि मेरे जिम में बीते दिनों सौ से ज्यादा लोग पहुंचकर हंगामा करने लगे। प्रदर्शनकारी कई गाड़ियों में हथियार लेकर पहुंचे हुए थे। पुलिस ने मुझे तो वहां से हटा दिया लेकिन बजरंग दल के लोग वहां घंटों हंगामा करते रहे। उधर, एक फरवरी को पुलिस ने इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च निकाला। लेकिन दीपक का कहना है कि उन्हें अभी भी धमकियां मिल रही हैं। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि देश को प्यार की जरूरत है, नफरत की नहीं। आप जितनी चाहें नफरत फैला लो, लेकिन प्यार बांटना बहुत बड़ी बात है।
इस बीच, घटना के बाद से ही दीपक कश्यप का जिम भी बंद पड़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। दीपक कश्यप का कहना है कि जिम कई दिनों से बंद है। जिम किराए की जगह पर है, जिसका हर महीने करीब 50 हजार रुपये किराया जाता है। तीन-चार दिन में ही बड़ा नुकसान हो गया है। घर वाले भी बहुत परेशान हैं। समझ में नहीं आता कि किसी की मदद करके और इंसानियत की बात करके हमने क्या गुनाह कर दिया है। लेकिन कुछ भी हो जाए, मैं नफरत के आगे नहीं झुकूंगा। मोहम्मद दीपक, बात यहीं पर खटक रही है। आपका कहना है कि आप झुकेंगे नहीं। जबकि एक बड़ा समूह आपको झुकाने की जिद पर अड़ा है। यदि आप नहीं झुकेंगे तो शायद विवाद और बढ़ेगा। इसलिए मामले को प्यार से सुलझाइए। विवाद बढ़ने से रोकने के लिए आपसी सामंजस्य बनाए रखना जरूरी है। जो लोग आपसे लड़ना चाहते हैं, उन्हें समझाइए कि इस तरह के विवाद से कुछ भी हासिल नहीं होना।
हालांकि मोहम्मद दीपक को करीब से जानने वाले कहते हैं कि दीपक का कोई असाधारण वादा नहीं, बल्कि स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। वो कहते हैं कि अगर भविष्य में उनके सामने फिर वैसी ही कोई स्थिति आती है, तो उनका रुख़ नहीं बदलेगा, जिस तरह उस दिन वह आगे आए थे, वैसा ही फिर करेंगे। दुकानदार वकील अहमद भी मानते हैं कि उस दिन हालात किस दिशा में जा सकते थे, यह सोचना ही बेचैन कर देता है। उनके मुताबिक़, अगर उस वक्त दीपक वहां नहीं होते, तो बात सिर्फ़ बहस तक सीमित रहती या नहीं, यह कहना मुश्किल है। अब दीपक का कहना है कि वह ऐसे देश की कल्पना करते हैं जहां लोग अपनी पहचान से पहले इंसान हों, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग साथ रहें, साथ चलें और एक-दूसरे के साथ सम्मान से पेश आएं। वकील अहमद के लिए भारत की तस्वीर इससे अलग नहीं है। उनके शब्दों में, एक अच्छा इंसान वही होता है जो दूसरे के भले के बारे में सोचे बिना यह देखे कि वह कौन है और कहां से आया है। दीपक कहते हैं कि वकील अहमद से मुलाक़ात यहीं खत्म नहीं होगी। जब भी वह उस रास्ते से गुज़रेंगे, वकील अहमद से मिलना उनकी प्राथमिकता रहेगी। वह कहते हैं कि बुजुर्गों का आशीर्वाद ज़िंदगी की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
मोहम्मद दीपक, आपको मेरी एक सलाह है। हमेशा समय, काल और परिस्थिति का ख्याल रखना चाहिए। आपके एक परोपकार से जो लोग आपसे नाराज हैं, उन्हें समझाइए। सोशल मीडिया का जमाना है। उन्हें संदेश दीजिए कि नफरत से कुछ नहीं होता। नफरत की उम्र लंबी नहीं होती। मोहब्बत की बातें अरसा तक याद रखी जाती है। बेशक, आपने वकील अहमद की मदद करके बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन आपके इस काम से जिन्हें परेशानी हुई है, उन्हें समझाना और उनके मानसिक शुद्धिकरण के लिए काम करना भी आपकी जिम्मेदारी है। इसलिए समाज में नफरत पर प्यार भारी रहे और हर कोई आपस में मिलजुलकर रहे, इसके लिए काम करने की जरूरत है। वजह स्पष्ट है, जीवन से लंबी मोहब्बत की उम्र होती है। (लेखक द भारत ख़बर के संपादक हैं।)
यह भी पढ़ें : Editorial Aaj Samaaj: थम गई एक नए सामाजिक क्रांति की दुंदुभि

