Nuclear Energy Explained: यूरेनियम का नाम सुनते ही सभी के दिमाग में परमाणु बम की तस्वीर सामने आती है। यूरेनियम को एनरिच्ड करके ही परमाणु बम बनाया जाता है। इसका इस्तेमाल बिजली बनाने में भी किया जाता है और कई देशों में यह एनर्जी का प्रमुख सोर्स है। भारत, अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और कई अन्य देश अपने करोड़ों नागरिकों को परमाणु एनर्जी से बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था और वहां से बिजली बनाने के लिए यूरेनियम आयात करने का समझौता भी किया था। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर जिस यूरेनियम से परमाणु बम बनाया जाता है, उसी से बिजली कैसे बनाई जाती है? इसकी क्या प्रक्रिया होती है और इसमें विस्फोट का कितना खतरा होता है।
यूरेनियम क्यों होता है इतना खास?
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट के मुताबिक यूरेनियम एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रेडियोएक्टिव पदार्थ है, जो पृथ्वी की चट्टानों और मिनरल्स में मौजूद होता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके कुछ परमाणु अस्थिर होते हैं और टूटने पर अत्यधिक मात्रा में एनर्जी छोड़ते हैं। यूरेनियम के कई समस्थानिक (Isotopes) होते हैं, लेकिन इनमें यूरेनियम-235 यानी U-235) सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह आसानी से न्यूक्लियर फिशन की प्रक्रिया से गुजर सकता है। प्राकृतिक यूरेनियम में U-235 की मात्रा केवल लगभग 0.7 प्रतिशत होती है, जबकि बाकी अधिकांश हिस्सा यूरेनियम-238 होता है। यही U-235 बिजली बनाने और परमाणु हथियार दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
बम और बिजली दोनों में होता है यूज
अधिकतर लोगों को लगता है कि न्यूक्लियर पावर प्लांट और परमाणु बम में एक जैसा यूरेनियम इस्तेमाल होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। इन दोनों में सबसे बड़ा अंतर यूरेनियम की शुद्धता यानी एनरिचमेंट में होता है। अधिकांश परमाणु बिजलीघरों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल में यूरेनियम-235 की मात्रा लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ाई जाती है, जबकि भारत के कई प्रेसराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम का भी उपयोग करते हैं। दूसरी तरफ परमाणु बम बनाने के लिए आमतौर पर 90 प्रतिशत या उससे ज्यादा U-235 वाला हाइली एनरिच्ड (Highly Enriched) यूरेनियम चाहिए होता है। यही कारण है कि बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला यूरेनियम परमाणु बम में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
रिएक्टर में कैसे पैदा होती है एनर्जी?
बिजली बनाने की पूरी प्रक्रिया का केंद्र न्यूक्लियर रिएक्टर होता है। सबसे पहले यूरेनियम को खदानों से निकालकर शुद्ध किया जाता है और फिर उससे छोटे-छोटे फ्यूल पेलेट बनाए जाते हैं। इन पेलेट्स को लंबी धातु की ट्यूबों में भरकर फ्यूल रॉड्स का रूप दिया जाता है और इन्हें रिएक्टर के भीतर लगाया जाता है। जब एक न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 के परमाणु से टकराता है, तो उसका नाभिक दो छोटे हिस्सों में टूट जाता है। इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन यानी न्यूक्लियर फिजन (Nuclear Fission) कहा जाता है। इस दौरान अत्यधिक गर्मी, एनर्जी और नए न्यूट्रॉन निकलते हैं। ये नए न्यूट्रॉन आगे दूसरे यूरेनियम परमाणुओं को तोड़ते हैं और इस तरह एक कंट्रोल्ड चेन रिएक्शन चलती रहती है। इससे बिजली के उत्पादन की प्रोसेस शुरू हो जाती है।
गर्मी से ऐसे बनाई जाती है बिजली
न्यूक्लियर रिएक्टर में पैदा हुई एनर्जी सीधे बिजली में नहीं बदलती है। न्यूक्लियर फिजन से पैदा गर्मी का उपयोग सबसे पहले पानी को अत्यधिक तापमान तक गर्म करने के लिए किया जाता है। यह पानी भाप में बदल जाता है और तेज दबाव वाली भाप विशाल टरबाइनों को घुमाती है। ये टरबाइन एक जनरेटर से जुड़े होते हैं। जैसे ही टरबाइन घूमता है, जेनरेटर मैकेनिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदल देता है। इसके बाद ट्रांसफॉर्मर के माध्यम से वोल्टेज बढ़ाकर बिजली को ट्रांसमिशन लाइनों के जरिए घरों, इंडस्ट्रीज और अन्य जगहों तक पहुंचाया जाता है। खास बात यह है कि बिजली बनने का यह अंतिम चरण कोयला या गैस आधारित थर्मल पावर प्लांट्स जैसा ही होता है। दोनों के बीच मुख्य अंतर केवल गर्मी पैदा करने के स्रोत का होता है। कोयला पावर प्लांट में गर्मी कोयला जलाकर पैदा की जाती है, जबकि परमाणु पावर प्लांट में यह गर्मी यूरेनियम के कंट्रोल्ड फिजन से मिलती है।
क्या परमाणु बिजलीघर भी फट सकता है?
अक्सर लोगों को लगता है कि यूरेनियम की वजह से न्यूक्लियर पावर प्लांट में भी बम की तरह विस्फोट हो सकता है, लेकिन यह गलतफहमी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार एक परमाणु बिजलीघर परमाणु बम की तरह विस्फोट नहीं कर सकता, क्योंकि उसमें हथियार-ग्रेड यूरेनियम नहीं होता है। उसकी संरचना भी कंट्रोल्ड एनर्जी प्रोडक्शन के लिए बनाई जाती है। अगर किसी कारण से कूलिंग सिस्टम पूरी तरह फेल हो जाए या गंभीर तकनीकी दुर्घटना हो, तो रिएक्टर को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसा हादसा 1986 में यूक्रेन के चेरनोबिल और 2011 में जापान के फुकुशिमा में हुआ था। इन घटनाओं के बाद दुनिया भर में परमाणु पावर प्लांट्स के सुरक्षा मानकों को और ज्यादा मजबूत बनाया गया है।
न्यूक्लियर एनर्जी के फायदे और चैलेंज
परमाणु एनर्जी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के दौरान बहुत कम ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। यही वजह है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों में इसे महत्वपूर्ण एनर्जी सोर्स माना जाता है। इसके अलावा बहुत कम मात्रा में फ्यूल से भारी मात्रा में बिजली पैदा की जा सकती है और परमाणु संयंत्र दिन-रात लगातार बिजली देने में सक्षम होते हैं। हालांकि इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। रेडियोएक्टिव कचरे का सुरक्षित निपटान काफी चैलेंजिंग होता है और न्यूक्लियर पावर प्लांट्स बनाने में बहुत ज्यादा खर्च होता है। इसके अलावा अत्यधिक सुरक्षा मानकों की जरूरत होती है। इन सब चुनौतियों के बावजूद भी कई देश इसे भविष्य की क्लीन एनर्जी का महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं। भारत भी इस दिशा में काफी आगे बढ़ रहा है।
भारत में परमाणु ऊर्जा की क्या स्थिति है?
भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) करता है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में न्यूक्लियर पावर प्लांट चल रहे हैं। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जिस यूरेनियम को दुनिया अक्सर परमाणु बम से जोड़कर देखती है, वही आधुनिक विज्ञान की मदद से करोड़ों लोगों के घरों, अस्पतालों और उद्योगों तक रोशनी भी पहुंचा रहा है। भारत लंबे समय से थोरियम आधारित रिएक्टर तकनीक पर भी रिसर्च कर रहा है, क्योंकि देश के पास थोरियम का विशाल भंडार मौजूद है।

