वाणिज्य और शिपिंग मंत्रालयों ने उनके लिए अनुपालन की समयसीमा बढ़ाने और बंदरगाह शुल्कों में छूट देने का जरूरी फैसला किया
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : विश्व व्यापार एक बार फिर से विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहा है। दो साल में यह दूसरी बार हुआ है कि इस तरह के हालात बने हों। पिछले साल यह हालात जहां अमेरिकी टैरिफ के चलते बने थे वहीं इस बार यह आलात अमेरिका और ईरान युद्ध के चलते बन रहे हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के चलते जहां पश्चिम एशिया में स्थिति लगातार बिगड़ रही है वहीं इस युद्ध की वजह से विश्व व्यापार आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि एक बार फिर से उद्योगपतियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय चल रहा है।
केंद्र सरकार ने यह उपाय निकाला
पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आए व्यावधान के बीच सरकार ने निर्यातकों को राहत देने का मन बनाया है। इस बारे में सरकार की ओर से शनिवार को कुछ बड़े एलान किए गए। पिछले महीने ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के साझा हमले के बाद व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस चुनौतीपूर्ण माहौल में निर्यातकों को असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अब उन्हें भारी नुकसान से बचाने के लिए वाणिज्य और शिपिंग मंत्रालयों ने उनके लिए अनुपालन की समयसीमा बढ़ाने और बंदरगाह शुल्कों में छूट देने का जरूरी फैसला किया है।
ईरान युद्ध से इसलिए बढ़ गया संकट
अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर हमला और उसके सर्वोच्च नेता आयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में राजनीति के साथ-साथ व्यापारिक माहौल भी तनावपूर्ण हो गया। लड़ाई के बाद बीते एक हफ्ते में समुद्री और हवाई दोनों ही तरह के मालभाड़े में भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही बीमा कंपनियों ने प्रीमियम भी बढ़ा दिया है।
यदि यही हालात लंबे समय तक तक बनी रहती है, तो वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों कीमत से जुड़ी प्रतिस्पर्धा खतरे में पड़ सकती है। जनवरी के आंकड़ों पर गौर करें तो, देश का निर्यात महज 0.61 प्रतिशत बढ़कर 36.56 बिलियन डॉलर रहा है और देश का व्यापार घाटा तीन महीने के उच्चतम स्तर 34.68 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, लड़ाई शुरू होने के पहले से ही अमेरिकी टैरिफ के कारण निर्यातकों को टैरिफ की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
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