Harish Salve on CJP Protest: भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने सोमवार को आरोप लगाया कि सिस्टम को अस्थिर करने और देश की तरक्की को रोकने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ विरोध-प्रदर्शन में विदेशी फंडिग की मदद ली जा रही है। साल्वे कहा कि सरकार को ऐसे आंदोलनों से सख्ती से निपटना चाहिए और विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच करनी चाहिए।
‘अस्थिरता में बाहरी ताकतों का हाथ’
समाचार एजेंसी आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में साल्वे ने कहा, ”कुछ विदेशी देश, खासकर अमेरिका, भारत से खुश नहीं हैं। क्या इस बात में कोई संदेह है कि नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में उथल-पुथल के पीछे कौन था? शेख हसीना को किसने हटाया और वहां नया प्रधानमंत्री कौन लेकर आया? मेरी राय में इन घटनाओं के पीछे बाहरी ताकतें थीं।”
‘एक पैटर्न में हो रहे प्रदर्शन’
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि भारत में भी कुछ लोग विरोध प्रदर्शनों के नेता बनकर सामने आए हैं, जिनमें यूट्यूबर्स भी शामिल हैं। कुछ लोग जर्मनी और दूसरे देशों में रहते हैं। वे इन गतिविधियों के लिए पैसा कहां से ला रहे हैं? प्रदर्शन आयोजित करने के लिए धन की जरूरत होती है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले छह से आठ महीनों में एक स्पष्ट पैटर्न दिखाई दिया है। जब मोदी सरकार होर्मुज संकट से निपटने, आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और भारत की सैटेलाइट क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, तब ये समूह सरकार को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता का वास्तविक आंदोलन नहीं है।
‘विदेशी फंडिंग की जांच करे सरकार’
उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच करे और उचित कार्रवाई करे। हालांकि, उन्होंने इस बात पर संदेह जताया कि क्या ये विरोध-प्रदर्शन लोगों की असली भावना को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि जांच शुरू की जाएगी।
‘जनता के विद्रोह का सबूत नहीं’
साल्वे ने कहा कि इन विरोध-प्रदर्शनों में जनता के विद्रोह का कोई सबूत नहीं दिखता है। उन्होंने इन विरोध-प्रदर्शनों की तुलना परीक्षा के पेपर लीक होने पर हुए छात्र प्रदर्शनों से की, जिन्हें लोगों का समर्थन मिला था क्योंकि लोग छात्रों की मुश्किलों को समझते थे।

