हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र आज 20 फरवरी से शुरू हो रहा है, जिसे लेकर प्रदेश की सियासत पूरी तरह सक्रिय हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है। इस सत्र में जहां सरकार अपनी उपलब्धियों को सदन में पेश करेगी, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, फैमिली आईडी, पेंशन और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे होगी और सबसे पहले शोक संदेश पढ़े जाएंगे। इसके बाद राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष का अभिभाषण होगा, जिसमें सरकार की नीतियों और आगामी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के साथ ही बजट सत्र की औपचारिक कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, जो वित्त मंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं, 2 मार्च को राज्य का बजट पेश करेंगे। इस बार सरकार करीब 2.15 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश कर सकती है, जो पिछले वर्ष के 2.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। इस बजट को प्रदेश के विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सत्र के दौरान सरकार अपनी प्रमुख योजनाओं और उपलब्धियों को सदन में प्रस्तुत करेगी। इनमें लाडो लक्ष्मी योजना, हाल ही में घोषित हजारों सरकारी नौकरियां, अपराध नियंत्रण के लिए की गई कार्रवाई, प्रशासनिक सुधार और डिजिटल सेवाओं का विस्तार जैसे मुद्दे शामिल हैं। सरकार का प्रयास रहेगा कि इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में विकास और सुशासन की तस्वीर को मजबूत तरीके से प्रस्तुत किया जाए।
वहीं विपक्ष की ओर से कांग्रेस ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। विपक्ष बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, परिवार पहचान पत्र में बदलाव, बुजुर्गों की पेंशन, राशन कार्ड, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने संकेत दिए हैं कि पार्टी इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी और जरूरत पड़ने पर विरोध प्रदर्शन भी करेगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सत्र से पहले मंत्रियों और विधायकों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विपक्ष के हर सवाल का जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि विपक्ष के आरोपों का प्रभावी तरीके से जवाब दिया जाए और अपनी नीतियों और उपलब्धियों को मजबूती से सदन में रखा जाए।
यह बजट सत्र 18 मार्च तक चलेगा और कुल 17 दिनों की कार्यवाही में राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इस दौरान राज्यसभा की दो रिक्त सीटों के लिए मतदान भी होना है, जिससे सत्र का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट सत्र प्रदेश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। सरकार जहां विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर जोर देगी, वहीं विपक्ष इन योजनाओं की प्रभावशीलता और क्रियान्वयन पर सवाल उठाएगा।

