पठानकोट: पंजाब से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां 82 साल के शर्म सिंह और 72 साल के कुलविंदर सिंह ने 200 फीट ऊंचे बिजली के टावर पर लगातार 50 दिन गुजारे हैं. ये दोनों बुजुर्ग 25 अगस्त को पठानकोट से करीब 10 किलोमीटर दूर माधौर गांव में डिप्टी कमिश्नर के रेजिडेंस के पास टावर पर चढ़ गए थे. भारी बारिश और तेज तूफान के बीच दोनों ने तिरपाल के सहारे टावर के ऊपर 50 दिन काटे. शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर इन्होंने यह खतरनाक कदम उठाया था. सोमवार को डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के भरोसे के बाद दोनों बुजुर्ग टावर से नीचे उतर आए हैं. एडमिनिस्ट्रेशन ने एक हफ्ते के अंदर पंजाब के वॉटर रिसोर्सेज मिनिस्टर बरिंदर कुमार गोयल के साथ मीटिंग कराने का वादा किया है. इस कमिटमेंट के बाद ही यह लंबा प्रोटेस्ट फिलहाल रुका है.
आखिर 82 और 72 साल के बुजुर्गों को क्यों चढ़ना पड़ा 200 फीट ऊंचे टावर पर?
यह पूरा विवाद शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट के लिए ली गई जमीन और रिहैबिलिटेशन से जुड़ा है. प्रोटेस्ट कर रहे कुलविंदर सिंह के मुताबिक डैम बनाने के लिए उनकी जमीन एक कनाल के बदले सिर्फ 2700 रुपये के मामूली मुआवजे पर एक्वायर की गई थी. उस समय जमीन देने वाले परिवारों के बच्चों को सरकारी नौकरी देने का वादा भी किया गया था.
कई साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने अपना यह वादा पूरा नहीं किया. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि डैम मैनेजमेंट की तरफ से नियुक्त किए गए करीब तीन दर्जन लोगों को हटाया जाए या फिर उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जाए. अपनी जमीन गंवाने के बाद भी ये परिवार आज तक इंसाफ और रोजगार के लिए भटक रहे हैं.
4 बाय 4 फीट के प्लेटफॉर्म पर आंधी और बारिश के बीच कैसे कटे 50 दिन?
70 और 80 साल से ज्यादा की उम्र में 200 फीट की ऊंचाई पर रहना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था. दोनों बुजुर्गों ने टावर के ऊपर सिर्फ 4 बाय 4 फीट का एक अस्थाई प्लेटफॉर्म बनाया था. उन्होंने सिर छुपाने के लिए ऊपर एक तिरपाल बांध रखी थी. इन 50 दिनों के दौरान पठानकोट में भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान का दौर भी चला. इतनी ऊंचाई और खराब मौसम ने उनकी शारीरिक परीक्षा ली, लेकिन दोनों बुजुर्ग अपने इरादे पर अडिग रहे.
कुलविंदर सिंह ने बताया कि इन मुश्किल हालातों ने उनके हौसले को और ज्यादा मजबूत कर दिया था. जब वे ऊपर टावर पर मौसम की मार झेल रहे थे, तब नीचे उनके परिवार वाले और समर्थक किसी ठोस फैसले का इंतजार कर रहे थे.
प्रशासन के किस वादे पर माने बुजुर्ग?
बैराज आउस्टीज संघर्ष कमेटी के प्रेसिडेंट दयाल सिंह ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के भरोसे के बाद ही दोनों बुजुर्गों ने प्रोटेस्ट खत्म करने का फैसला लिया है. प्रशासन और डैम अथॉरिटीज ने उन्हें वॉटर रिसोर्सेज डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी और मिनिस्टर के साथ एक हफ्ते में मीटिंग कराने का भरोसा दिया है.
घर लौटने के बाद कुलविंदर सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ‘हम इस भरोसे पर नीचे उतरे हैं कि हमारी शिकायतों को सुना जाएगा. अगर सरकार हमारी मांगों को पूरा करने में फेल रहती है, तो उसे एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहना चाहिए’. उन्होंने साफ कर दिया कि टावर से नीचे उतरने का मतलब अपनी लड़ाई छोड़ना बिल्कुल नहीं है. अगर इस मीटिंग से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो वे अपने प्रोटेस्ट को और तेज करेंगे.