इसी माह दोनों पक्षों में हो सकते हैं मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर
India-EU FTA (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पिछले करीब 10 माह से पूरे विश्व के लिए अमेरिका ने नई टैरिफ पॉलिसी को एक नई चुनौती के रूप में पेश किया है। अमेरिका की इस पॉलिसी ने न केवल दुनिभर भर के देशों के सामने नई व्यापारिक परेशानी खड़ी की है बल्कि पूरे विश्व को आर्थिक मंदी के खतरे में भी डाल दिया है।
अमेरिका की इसी टैरिफ नीति से भारत और यूरोपीय संघ भी परेशान है। एक तरफ जहां भारत अमेरिका के उच्च टैरिफ का सामना कर रहा है तो वहीं यूरोपीय संघ को भी कई बार उच्च टैरिफ की धमकी अमेरिका दे चुका है। शायद यही कारण है कि भारत और यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द मूर्त रूप देना चाहते हैं।
इसलिए जरूरी है भारत-ईयू एफटीए
यदि यूरोपीय यूनियन और भारत में बेहतर समझौता होता है तो इससे अमेरिका पर भी दबाव पड़ेगा। ट्रंप अपने टैरिफ को कम करने और भारत से एक बेहतर समझौते के लिए प्रेरित हो सकते हैं। टैरिफ वॉर के बाद भी भारत ने 2025-26 में बेहतर जीडीपी बढ़त हासिल की है, लेकिन टैरिफ के कारण भारत का कुछ क्षेत्रों में व्यापार प्रभावित हुआ है। यदि भारत को टैरिफ का सामना न करना पड़ता तो उसकी जीडीपी बढ़त और बेहतर हो सकती थी।
आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि टैरिफ वॉर समाप्त न हुआ तो आने वाले समय में इसके अधिक नुकसानदायक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। भारत का इसके सबसे बड़े व्यापारिक साझीदार अमेरिका को होने वाला व्यापार कई क्षेत्रों में प्रभावित हो सकता है। यूरोपीय यूनियन से समझौते जैसे अहम कदमों से भारत टैरिफ से हुए नुकसान को सीमित करने में सफल साबित हो सकता है।
भारत कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक
भारत पूरे विश्व के साथ-साथ यूरोपीय देशों के लिए तैयार कृषि उत्पादों का बड़ा सप्लायर है। भारत में तैयार हुए फल-फूल, सब्जी के साथ-साथ अनाज और प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए यूरोपीय देश बड़े बाजार हैं। इसके अलावा भारत इन देशों को पेट्रोलियम उत्पाद, कपड़े, आभूषण और दवाइयां भी निर्यात करता है। यदि यूरोपीय यूनियन भारतीय उत्पादों पर कम टैक्स लगाने को सहमत हो जाते हैं तो इससे यूरोपीय देशों में भारतीय उत्पाद सस्ते और अधिक लोकप्रिय हो सकते हैं। इससे भारत और भारतीय कृषि उत्पादकों को लाभ होगा। इससे रोजगार के क्षेत्र में भी प्रगति होगी।
दोनों के बीच 200 अरब डॉलर पहुंच सकता है व्यापार
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 2024-25 में 11.8 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। मोटे तौर पर यह व्यापार थोड़ा भारत के पक्ष में झुका हुआ, लेकिन संतुलन भरा रहा था। यदि भारत बेहतर डील हासिल करे तो भारत को इससे अधिक लाभ हो सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि भारत ने टैक्स रहित व्यापार के लिए यूरोपीय यूनियन की अनुमति हासिल कर ली तो उसका व्यापार 136 अरब डॉलर से 200 अरब डॉलर पर पहुंच सकता है।
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