फरीदाबाद. बरसात का मौसम किसानों के लिए राहत के साथ-साथ कई परेशानियां भी लेकर आता है. खेतों में सब्जियों की फसल तैयार है, लेकिन बारिश के इस मौसम में कीड़ों का हमला किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया है. खासकर तोरी की फसल में पत्ते सिकुड़ रहे हैं, पीले पड़ रहे हैं और कीड़े डंक मारकर तोरी को खराब कर रहे हैं. ऐसे में किसान के लिए फसल बचाना मुश्किल हो रहा है. हालांकि, फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव के एक किसान ने इसका तरीका निकाल लिया है. उसका कहना है कि एक दवा के छिड़काव से कीड़ों से बचाव हो रहा है और पत्तों की ग्रोथ भी अच्छी हो रही है. सुनपेड़ गांव के किसान महेंद्र सैनी लोकल 18 से बताते हैं कि इस समय तोरी की खेती में सबसे बड़ी समस्या कीड़ों की है. बरसात के मौसम में कीड़ा तोरी में डंक मार देता है, जिससे तोरी खराब हो जाती है. इसकी वजह से खेत में अच्छी फसल होने के बावजूद किसान को नुकसान उठाना पड़ रहा है. महेंद्र बताते हैं कि एक एकड़ में तोरी की खेती पर करीब 50 हजार रुपये की लागत आती है. मंडी में किसानों से अभी तोरी 15 से 20 रुपये किलो के आसपास खरीदी जा रही है.
बरसात आते ही आफत शुरू
महेंद्र सैनी बताते हैं कि शुरुआत में तोरी का रेट इससे भी ऊपर गया था और अच्छा मुनाफा हो रहा था, लेकिन अब कीड़ों की वजह से परेशानी बढ़ गई है. फसल खराब होने के कारण मंडी तक पहुंचाने के लिए भी माल कम बच रहा है. अगर बाजार की बात करें तो ग्राहकों को खुदरा बाजार में तोरी करीब 60 रुपये किलो मिल रही है. यानी किसान को 15 से 20 रुपये किलो मिल रहा है, जबकि ग्राहक तक पहुंचते-पहुंचते इसका रेट काफी बढ़ जाता है. महेंद्र सैनी बताते हैं कि मैंने फरवरी महीने में तोरी की बुवाई की थी. शुरुआत में मौसम और रेट दोनों ठीक रहे, जिससे मुझे अच्छी कमाई की उम्मीद थी, लेकिन बरसात शुरू होते ही कीड़ों की समस्या आने लगी. इस बार फरीदाबाद में बरसात थोड़ी कम हुई है. अगर बारिश ज्यादा होती है तो सब्जियों के रेट बढ़ सकते हैं, लेकिन बारिश कम होने पर रेट नीचे भी जा सकता है. मेरे लिए सबसे बड़ी चिंता अभी फसल को बचाना है.
एक एकड़ में कितना खर्च
महेंद्र सैनी बताते हैं कि जितना नुकसान होना था, वह तो हो गया, लेकिन अब मैंने इसका समाधान निकाल लिया है. साइबर 25 और रेडीमा गोल्ड नाम की दवाइयों का इस्तेमाल मैं कर रहा हूं. एक पैकेट करीब 500 से 700 रुपये का आता है. एक एकड़ में एक बार के छिड़काव के लिए यह पर्याप्त है. इनके छिड़काव से कीड़ों से बचाव हो रहा है और पत्तों में भी ग्रोथ अच्छी हो रही है. इससे तोरी की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है. एक एकड़ में दवाई और छिड़काव पर एक बार में करीब 1000 रुपये तक का खर्च आ रहा है. महेंद्र बताते हैं कि बरसात के मौसम में सिर्फ एक बार दवाई का छिड़काव करने से काम नहीं चलता. कीड़ों से बचाव के लिए करीब 10 दिन के अंतर पर छिड़काव करना पड़ रहा है.

