
30 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आया था संडेला वीरन्ना
Government Teacher Arrest, (द भारत ख़बर), हैदराबाद: मार्च 1984 में पुलिस जिस कैदी के वापस जेल लौटने का इंतजार कर रही थी, वह अगले 40 सालों तक कानून की पहुंच से बाहर रहा। उम्रकैद की सजा से भागकर उसने न सिर्फ सरकारी स्कूल में टीचर की नौकरी हासिल की, बल्कि अपने काम के लिए बेस्ट टीचर का अवॉर्ड भी पाया।
सम्मान के साथ रिटायर होने के बाद आखिरकार जिंदगी के आखिरी पड़ाव (2024) पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। तेलंगाना जेल विभाग की एक स्पेशल टास्क फोर्स ने महबूबाबाद पुलिस की मदद से उसे ढूंढ निकाला और चेर्लापल्ली सेंट्रल जेल में डाल दिया।
हत्या के मामले में ठहराया गया था दोषी
संडेला वीरन्ना, जिसकी उम्र 70 साल के करीब है, उसे 1970 के दशक के आखिर में एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस मामले में आरोपी को 1983 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई, लेकिन सजा शुरू होने के छह महीने बाद ही वीरन्ना को पैरोल पर रिहा कर दिया गया, लेकिन पैरोल पर रिहा होने के बाद वो कभी जेल वापस नहीं लौटा।
हाई कोर्ट ने खारिज की दोबारा पैरोल की याचिका
संडेला वीरन्ना की पत्नी संडेला चरम्मा ने हाल ही में मेडिकल और मानवीय आधार पर लगातार जेल में कैद और पिछले तीन सालों से पैरोल न मिलने को तेलंगाना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
वीरन्ना के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जााहिर करते हुए जस्टिस टी माधवी देवी ने कहा, अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि और बाद में दोषी ठहराए जाने की बात छिपाकर सरकारी नौकरी में आना ही बहुत कुछ कहता है।
2004 में बेस्ट टीचर का अवॉर्ड मिला, 2013 में हुआ रिटायर
जस्टिस टी माधवी देवी ने आगे कहा कि उसकी सरकारी नौकरी और बिना किसी रुकावट के की गई सेवा से पता चलता है कि उसने धोखे से नौकरी हासिल की थी। संडेला वीरन्ना ने जेल से बाहर रहने के दौरान इन चार दशकों के दौरान महबूबाबाद जिले के डंथलापल्ली में आरामदायक जिंदगी बिताई।
वीरन्ना को सरकारी टीचर की नौकरी भी मिली, जिसमें उसे 2004 में बेस्ट टीचर का अवॉर्ड मिला। यहां तक कि वह 2013 में अपने पद से रिटायर भी हो चुका है।
मेडिकल आधार पर रिहाई की मांग
अपनी याचिका में, खुद एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी चराम्मा ने कोर्ट को बताया कि इतनी लंबी देरी के बाद वीरन्ना की बची हुई जेल की सजा को जारी रखना मनमाना था। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें पैरोल के कथित उल्लंघन के बारे में अपनी बात रखने का उचित मौका नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता संडेला वीरन्ना की पत्नी ने बताया कि उनका बेटा यूके का स्थायी निवासी है और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा, इसके अलावा, वह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनके लिए तुरंत और विशेष मेडिकल इलाज की जरूरत है और उनकी सेहत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
गृह विभाग ने किया पैरोल याचिका का विरोध
याचिका का विरोध करते हुए, गृह विभाग के सरकारी वकील महेश राजे ने कहा कि वीरन्ना ने पैरोल के बाद जानबूझकर सरेंडर नहीं किया था और उन्हें खोजने और पकड़ने के लिए कई बार ढूंढना पड़ा। राजे ने बताया कि चेरलापल्ली में मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं और कैदियों को विशेष इलाज भी दिया जा रहा है।
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