INS Anjadip, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: भारतीय नौसेना को एक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत मिल गया है। उथले पानी में काम करने की क्षमता वाले ‘अंजदीप’ को आज चेन्नई बंदरगाह में आयोजित एक समरोह के दौरान औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। समरोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी समारोह में शामिल हुए। इसके अलावा सीनियर ऑफिसर, सरकारी व अन्य अधिकारी इस मौके पर मौजूद रहे।
आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की श्रृंखला का तीसरा युद्धपोत
नौसेना को ‘अंजदीप’ मिलने से बल की ताकत और बढ़ गई है। आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की श्रृंखला का यह तीसरा युद्धपोत स्वदेशी और अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली से लैस है। नौसेना के अधिकारियों ने कहा कि आईएनएस अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है और इसे विशेष तौर पर तटीय युद्ध वातावरण की चुनौतियों का सामना करने के मकसद से डिजाइन किया गया है। पनडुब्बी रोधी युद्ध की भूमिका के अलावा यह पोत कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों, तटीय निगरानी तथा खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने के लिए भी सुसज्जित है।
दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना मुख्य उद्देश्य
कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने ‘अंजदीप’ स्वदेशी तौर पर निर्मित किया है। यह ‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उनका पीछा करके उन्हें नष्ट करना है। अंजदीप 77 मीटर लंबा है और इसमें एक हाई-स्पीड वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम लगा है, जो इसे त्वरित प्रतिक्रिया व बिना रुके संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है।
आयात पर निर्भरता होगी कम
अंजदीप इंडियन नेवी के इसी नाम वाले पुराने युद्धपोत का नया अवतार है। पुराना युद्धपोत 2003 में रिटायर हो गया था। कर्नाटक के कारवार तट के समीप स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर युद्धपोत का नाम रखा गया है। इसके निर्माण में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री लगाई गई है। इससे देश की रक्षा निर्माण क्षमता मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता भी घटेगी।
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