Prashant Kishore Win (द भारत ख़बर), पटना: बिहार में हुए विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19324 वोट से करारी शिकस्त दी। इस सीट से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन विधायक थे। पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी थी। इस सीट पर हार बीजेपी के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इसे भाजपा का किला माना जाता था। बीजेपी के कोर वोटर रहे कायस्थों की बहुलता वाली इस सीट पर प्रशांत किशोर की जीत बिहार में बदलती राजनीति का संकेत दे रही है
संघर्ष से शुरुआत
बिहार की राजनीति में सक्रिय एक ऐसा शख्स जिसे कभी नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी माना गया था, लेकिन वैचारिक मतभेदों की वजह से दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा बन गया। इस शख्स ने बिहार की राजनीति में ‘चाणक्य’ माने जाने वाले नीतीश कुमार को सीधी चुनौती दी। भले ही, उनकी पार्टी ‘जन सुराज’ को 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली, लेकिन जोश आज भी बरकरार है। इस शख्स का नाम है पीके उर्फ प्रशांत किशोर, जिसने नितिन नबीन के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुई पटना की बांकीपुर सीट पर ताल ठोक दिया और प्रचंड जीत दर्ज की। आइए, हम इस शख्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।
पीके के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर एक भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार हैं। उन्होंने आठ वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में काम किया। इसके बाद, भारतीय राजनीति में प्रवेश किया और राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्य किया। मौजूदा समय में, बिहार में सरकार के खिलाफ हो रहे तमाम प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और सत्ता पक्ष को सीधी चुनौती दे रहे हैं।
व्यक्तिगत जीवन और करियर
प्रशांत किशोर का जन्म 1977 में बिहार के रोहतास जिले में सासाराम के पास कोनार गांव में एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता श्रीकांत पांडे डॉक्टर थे और मां सुशीला पांडे गृहिणी थीं। बाद में उनका परिवार बक्सर आकर बस गया, जहां से उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) और मास्टर ऑफ हेल्थ केयर मैनेजमेंट (MHA) की पढ़ाई की है। उनकी पत्नी डॉ. जहान्वी दास असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं और पेशे से चिकित्सक हैं। दोनों का एक बेटा भी है। राजनीति में आने से पहले, किशोर ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के सहयोग से लगभग आठ वर्षों तक लोक स्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) के क्षेत्र में काम किया।
राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्य
इन पार्टियों के लिए कर चुके हैं काम
प्रशांत किशोर ने कई प्रमुख भारतीय राजनीतिक दलों के लिए सफलतापूर्वक रणनीतिकार के रूप में कार्य किया है। इनमें बीजेपी, जेडीयू, कांग्रेस, आप, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, डीएमके और टीएमसी जैसी पार्टियां शामिल हैं।
इन नेताओं के लिए चलाए अभियान
प्रशांत किशोर ने देशभर की अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलकर सफलतापूर्वक चुनाव अभियान चलाए, जिनमें कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए पंजाब विधानसभा चुनाव-2017, वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी के लिए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव-2019, अरविंद केजरीवाल के लिए दिल्ली राज्य विधानसभा चुनाव-2020, ममता बनर्जी के लिए पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव-2021 और एम. के. स्टालिन के लिए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव-2021 शामिल हैं।
मोदी को जिताने में निभा चुके हैं भूमिका
उनका पहला प्रमुख राजनीतिक अभियान 2011 में था, जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर दोबारा निर्वाचित करने में सहायता की। हालांकि, उन्हें व्यापक पहचान तब मिली जब उन्होंने ‘सिटिज़न्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG)’ नामक एक चुनावी अभियान समूह की स्थापना की, जिसने भारतीय जनता पार्टी को आम चुनाव, 2014 में पूर्ण बहुमत से जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुजरात में खेली बड़ी पारी
किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) या गुजरात सरकार में किसी पद को स्वीकार किए बिना वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की पूर्व-चुनावी रणनीति को लेकर एक प्रमुख राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्य किया। साल 2013 में किशोर ने रॉबिन शर्मा और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ‘सिटिज़न्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG)’ नामक एक मीडिया एवं जनसंपर्क संस्था की स्थापना की। इसका उद्देश्य मई 2014 के आम चुनाव के लिए अभियान तैयार करना था। किशोर और उनकी टीम को नरेंद्र मोदी के लिए अभिनव विपणन और प्रचार अभियान तैयार करने का श्रेय दिया गया, जिनमें चाय पर चर्चा कार्यक्रम, 3D रैलियां, रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम मंथन और कई सोशल मीडिया अभियानों की संकल्पना प्रमुख थे।
नीतीश को गद्दी दिलाने के लिए बनाई रणनीति
उन्होंने वर्ष 2015 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन को बिहार विधान सभा चुनाव में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। प्रशांत किशोर और अन्य CAG सदस्यों ने मिलकर I-PAC की स्थापना की और बिहार में नीतीश कुमार को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने के लिए चुनावी रणनीति गढ़ी। चुनाव जीतने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को ‘योजना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन सलाहकार’ नियुक्त किया, ताकि चुनाव से पहले किए गए वादों, जैसे कि सात निश्चय योजना को धरातल पर उतारा जा सके।
उत्तर प्रदेश में नहीं साथ दी किस्मत
साल 2016 में कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के लिए नियुक्त किया, लेकिन यह चुनाव कांग्रेस और प्रशांत किशोर दोनों के लिए असफल रहा। भाजपा ने 300 से अधिक सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस मात्र 7 सीटों पर सिमट गई।
रणनीतिकार का काम छोड़ा
2021 के पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और डीएमके की जीत के बाद प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीतिकार के काम से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने एनडीटीवी के साथ 2 मई, 2021 को दिए साक्षात्कार में कहा, ”मैं अब इस क्षेत्र में नहीं रहना चाहता। काफी कर लिया। अब जीवन में कुछ और करना चाहता हूं। अब इस क्षेत्र से विदा लेने का समय है।”
जन सुराज की स्थापना
करीब एक वर्ष बाद, 2 मई 2022 को प्रशांत किशोर ने ट्विटर पर संकेत दिया कि अब वे ”वास्तविक मालिकों – जनता” के पास लौटना चाहते हैं और ”जन सुराज – जनता का सुशासन” की ओर कदम बढ़ाएंगे। इसके बाद, उन्होंने बिहार भर में 3,000 किलोमीटर की पदयात्रा की घोषणा की, जिसका उद्देश्य राज्य के अलग-अलग इलाकों में जाकर आम जनता से संवाद स्थापित करना था। इस अभियान के तहत उन्होंने एक राजनीतिक दल के गठन का संकेत दिया, जिसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ना था। 2 अक्तूबर, 2024 को उन्होंने ”जन सुराज अभियान” को एक औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में घोषित किया, जिसका नाम जन सुराज पार्टी रखा गया। हालांकि, उनकी पार्टी को 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली।
जद (यू) से की थी राजनीति की शुरुआत
प्रशांत किशोर 16 सितंबर, 2018 में जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हुए थे और उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। जनवरी 2020 में नीतिगत मतभेदों और बयानों के चलते नीतीश कुमार की पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। इसके बाद से वह अपनी पार्टी ‘जन सुराज’ का नेतृत्व कर रहे हैं।

