यह मामला हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा विज्ञापन संख्या 3/2021 के तहत आयोजित सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। याचिकाकर्ता अमित ने चयन प्रक्रिया के दौरान तीन प्रश्नों की उत्तर-कुंजी को गलत बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के साथ-साथ शारीरिक दक्षता परीक्षा, शारीरिक माप और दस्तावेजों की जांच शामिल थी, जबकि अंतिम मेरिट सूची लिखित अंकों, अतिरिक्त योग्यता और सामाजिक-आर्थिक मानदंडों के आधार पर तैयार की जानी थी।
अमित ने 26 सितंबर 2021 को आयोजित लिखित परीक्षा में भाग लिया था। परीक्षा के बाद जब प्रारंभिक उत्तर-कुंजी जारी हुई और आपत्तियां मांगी गईं, उस समय उसने किसी भी प्रश्न पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। बाद में वह चयनित भी हो गया था और उसके कुल 67.20 अंक बने थे, जिनमें से 5 अंक सामाजिक-आर्थिक श्रेणी के तहत मिले थे। हालांकि, बाद में शिकायतों के आधार पर हुई जांच में यह सामने आया कि उसके पिता दिल्ली पुलिस में कार्यरत थे, जबकि अमित ने शपथ-पत्र देकर दावा किया था कि उसके परिवार में कोई भी सरकारी कर्मचारी नहीं है। इस तथ्य के सामने आने के बाद उसके 5 सामाजिक-आर्थिक अंक काट दिए गए, जिससे वह कट-ऑफ से नीचे चला गया।
इसके बाद अमित ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तीन सवालों की उत्तर-कुंजी को चुनौती दी। इनमें हरियाणा के पूर्व डीजीपी की मृत्यु से जुड़ा प्रश्न, गेहूं बोने के उपयुक्त तापमान से संबंधित प्रश्न और अनुच्छेद 370 हटाने की तारीख से जुड़ा सवाल शामिल था। कोर्ट ने इन तीनों ही बिंदुओं पर आयोग के पक्ष को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि पहले प्रश्न में आयोग का उत्तर तथ्यात्मक रूप से सही है, दूसरे प्रश्न में विषय तकनीकी है, जिसमें विशेषज्ञों की राय को बदला नहीं जा सकता, जबकि तीसरे प्रश्न में संसद ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 से जुड़े संशोधन पारित किए थे, इसलिए वही तारीख सही मानी जाएगी, भले ही राष्ट्रपति की अधिसूचना 6 अगस्त को जारी हुई हो।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए यह भी दोहराया कि उत्तर-कुंजी में बदलाव तभी किया जा सकता है, जब वह स्पष्ट रूप से गलत साबित हो। केवल आशंका या व्यक्तिगत असहमति के आधार पर चयन संस्था के निर्णय को चुनौती नहीं दी जा सकती। चूंकि याचिकाकर्ता न तो उत्तर-कुंजी में कोई स्पष्ट गलती साबित कर पाया और न ही उसने सामाजिक-आर्थिक लाभ से जुड़ा सही तथ्य प्रस्तुत किया था, इसलिए अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
इस फैसले के बाद हरियाणा पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर काफी हद तक विराम लग गया है और चयन आयोग के निर्णय को कानूनी मजबूती मिली है।

