कहा- कानून की नजर में अश्लीलता, अभद्रता, गाली-गलौज या अपशब्दों से अलग है
Supreme Court, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी विवाद के दौरान गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना अपने आप में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 294(बी) के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं माना जा सकता। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि कोई शब्द तभी अश्लील माना जाएगा, जब वह कामुकता को बढ़ावा देने वाला हो या लोगों को भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखता हो। कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु के एक मामले में सुनवाई के दौरान की। आरोपी मणि को जमीन विवाद के दौरान मां की गाली देने के लिए अश्लीलता के आरोप में दोषी ठहराया गया था।
जमीन के विवाद में गाली-गलौज और जातिसूचक शब्द बोले थे
अगस्त 2017 में जमीन विवाद को लेकर आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज की थी। पीड़ित का आरोप था कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों भी कहे। बाद में घर से हथियार लाकर हमला कर दिया, जिससे उसकी नाक की हड्डी टूट गई थी।
अश्लीलता और आपराधिक धमकी के आरोपों से किया बरी
सुप्रीम कोर्ट ने अश्लीलता और आपराधिक धमकी (आईपीसी की धारा 506) के आरोपों से आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गाली देने से किसी को परेशानी हुई, यह साबित नहीं हुआ। हालांकि, शिकायतकर्ता को गंभीर चोट पहुंचाने (आईपीसी की धारा 326) के मामले में उसकी सजा बरकरार रखी गई है।
कोर्ट उठने तक की कैद
आरोपी की उम्र करीब 70 साल होने और स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने उसकी सजा को घटाकर ‘कोर्ट उठने तक की कैद’ कर दिया है। साथ ही, उसे 2 महीने के भीतर 50,000 रुपए का जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया है।

