
बुजुर्ग की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए सजा की गई माफ
Supreme Court, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के हत्या मामले में दोषी 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 2024 में दी गई उनकी अंतरिम जमानत को अंतिम करते हुए शेष सजा माफ कर दी। अत्यधिक उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए अदालत ने मामला बंद कर दिया और स्पष्ट किया कि उन्हें अब दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा।
मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए साफ किया कि भले ही उनकी उम्रकैद की पूरी अवधि खत्म न हुई हो, लेकिन उन्हें अब दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने साल 2024 में दिए गए उनके अंतरिम जमानत के आदेश को पूर्ण और अंतिम रूप दे दिया है।
1994 से जेल में बंद थे रसिक चंद्र मंडल
बता दें कि पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को साल 1994 में एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी। वह तब से जेल में बंद थे, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को उन्हें जमानत नहीं दे दी। बुजुर्ग होने के कारण उन्हें कई उम्र संबंधी बीमारियां और स्वास्थ्य समस्याएं थीं।
कलकत्ता हाईकोर्ट खारिज कर दी थी याचिका
इसके बाद 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने रसिक चंद्र मंडल की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपनी सजा को चुनौती दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उनकी याचिका खारिज हो गई थी।
2021 में सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
गौरतलब है कि उम्र के 99वें साल में पहुंचने पर उन्होंने अपनी अत्यधिक उम्र और स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की याचिका दाखिल की। इसके बाद मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था। इसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2024 में उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी, जिसे अब अदालत ने फाइनल कर दिया है।
रसिक चंद्र मंडल ने की थी भाई की हत्या
दरअसल, रसिक चंद्र मंडल ने 1988 में पारिवारिक विवाद के मामले में अपने भाई सुरेश मंडल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने रसिक समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था, जहां साल 1994 में कोर्ट ने 68 साल की उम्र में उन्हें इस घटना में दोषी पाया था, जिसके बाद रसिक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
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