साल 1963 में सात पाके बाधा नाम की फिल्म के लिए मिला था अवॉर्ड
Suchitra Sen, (द भारत ख़बर), मुंबई: इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की विरासत बहुत बड़ी है और एक सदी से भी ज्यादा समय से ये इंडस्ट्री ग्रो कर रही है। इस इंडस्ट्री ने अब तक लंबा सफर तय किया है और दुनियाभर में अपना वर्चस्व स्थापित किया है। कई कलाकार इस मौके पर ऐसे रहे हैं जिन्होंने कीर्तिमान रचा है। इसमें बंगाली सिनेमा की एक एक्ट्रेस का नाम शामिल है।
हम जिस एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं उसका नाम सुचित्रा सेन है। सुचित्रा की खास बात ये रही है कि वे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहली ऐसी एक्ट्रेस थीं जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिली थी और उनका खूब नाम हुआ था। मूल रूप से बंगाली सिनेमा से ताल्लुक रखने वाली इस एक्ट्रेस ने हिंदी फिल्मों में भी काम किया था।
मिला था बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान
सुचित्रा सेन ने साल 1963 में सात पाके बाधा नाम की फिल्म के लिए तीसरे मॉस्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान हासिल किया था। इसके पहले तक कोई भी एक्ट्रेस इंटरनेशनल लेवल पर कोई अवॉर्ड हासिल नहीं कर सकी थी। सुचित्रा सेन ने साल 1953 में आई फिल्म 7 नंबर कायेदी से अपना डेब्यू किया था। इसके बाद एक्ट्रेस ने 2 साल में ही दिलीप कुमार की फिल्म देवदास से अपना हिंदी डेब्यू भी कर लिया था।
उन्होंने ऋषिकेश की डेब्यू फिल्म मुसाफिर में भी एक्टिंग की थी। इसके अलावा वे बंबई का बाबू, सरहद, ममता और आंधी फिल्म में काम किया था। गुलजार के निर्देशन में बनी आंधी फिल्म में वे संजीव कुमार के अपोजिट नजर आई थीं। ये फिल्म जितनी कॉन्ट्रोवर्सी में रही थी उतनी ही पॉपुलैरिटी भी इस फिल्म ने हासिल की थी। फिल्म के गाने आज भी खूब पसंद किए जाते हैं। इस फिल्म के बाद वे किसी भी हिंदी मूवी में नजर नहीं आईं।
1972 में पद्म श्री से किया गया था सम्मानित

सुचित्रा सेन के नक्शे कदम पर चलते हुए ही उनकी बेटी मून मून सेन ने भी अभिनय में हाथ आजमाया। और एक्ट्रेस की दोनों नातिन राइमा सेन और रिया सेन भी फिल्मों में नजर आईं। सुचित्रा सेन को फिल्म जगत में उनके सराहनीय काम के लिए साल 1972 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।
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