Sonam Wangchuk Hunger Strike Par Kyu Hain | Sonam Wangchuk Hunger Strike Reason: भारत के फेमस सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण विशेषज्ञ सोनम वांगचुक इन दिनों एक बड़े विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बने हुए हैं. दिल्ली में वो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिसके चलते उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है.
59 वर्षीय सोनम वांगचुक अपनी अनोखी सोच, हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर किए गए काम और आमिर खान की चर्चित फिल्म 3 इडियट्स के किरदार से प्रेरणा बनने के कारण दुनिया भर में पहचाने जाते हैं. हालांकि, इस बार उनका आंदोलन पर्यावरण या जलवायु परिवर्तन से जुड़ा नहीं है. इस भूख हड़ताल का मेन मुद्दा देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे सवाल हैं.
सोनम वांगचुक ने क्यों शुरू की हड़ताल?
सोनम वांगचुक ने छात्रों और युवाओं की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है. ये आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम के एक नागरिक अभियान से जुड़ा हुआ है, जिसकी शुरुआत एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके ने की थी.
CJP ने सोशल मीडिया के जरिए बड़ी संख्या में युवाओं का ध्यान आकर्षित किया. संगठन ने प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाई है. 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन शुरू हुआ. इसके बाद 28 जून को सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन में शामिल हो गए और छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठ गए.
प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी बना बड़ा मुद्दा
भारत में हाल के समय में कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए हैं. इनमें पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं. सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर हुई, जिसमें लाखों छात्रों ने हिस्सा लिया था. पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए और छात्रों में नाराजगी बढ़ गई.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और परीक्षा प्रणाली में भरोसा कमजोर होता है.
CJP की क्या-क्या मांगें हैं?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का कहना है कि देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत है. संगठन पारदर्शी प्रक्रिया, जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहा है.
इसके अलावा संगठन उन परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी कर रहा है, जिन्होंने परीक्षा संबंधी परेशानियों के कारण अपने बच्चों को खोया है. प्रदर्शनकारियों की एक मेन मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने की भी है. उनका तर्क है कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े इतने बड़े विवादों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए.
सोनम वांगचुक के आंदोलन का महत्व
सोनम वांगचुक का ये कदम छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ले आया है. उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए सुधार और जवाबदेही बेहद जरूरी है. फिलहाल उनकी भूख हड़ताल जारी है और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है.

