PM Modi In Bengal: पश्चिम बंगाल के हुगली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जारी की। इस दौरान उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि “बाबा तारकनाथ और बंगाल की यह पुण्यभूमि, पश्चिमबंग दिवस की यह ऐतिहासिक तारीख और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, आज चुनाव और शपथ ग्रहण के बाद मुझे पहली बार आपके बीच आने का सौभाग्य मिला है। बंगाल की हवा में अब एक नई ताज़गी है। यहां के कण-कण से एक नई खुशबू आ रही है, ऐसा लग रहा है जैसे बंगाल अब बेड़ियों से आज़ाद हो गया है। जैसे बंगाल का गौरव लौटने का आरंभ हो गया है। आज का यह कार्यक्रम साक्षी है, इन परियोजनाओं का शुभारंभ गवाह है कि हमारा बंगाल अपने नए भविष्य के निर्माण में जुट गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “इस बार पश्चिमबंग दिवस की यह तारीख और भी खास है। आज़ादी के बाद बंगाल के उज्जवल भविष्य के लिए जो सपना देखा गया था, बंगाल की महान आत्माओं ने जो परिकल्पना की थी। आज पहली बार हम पश्चिमबंग दिवस पर उन सपनों को सच्चाई में बदलते देख रहे हैं। यह ऐतिहासिक तारीख पश्चिम बंगाल के विकास की प्रेरणा बने, हम एक नया और गौरवशाली इतिहास रचे। आज भाजपा-NDA सरकार में विकास के महाअभियान की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि “बंगाल में दशकों तक पहले लेफ्ट और फिर TMC ने जो गड्ढे बनाए, उन्हें भरने के लिए डबल इंजन सरकार ने सुपरफास्ट गति से काम करना शुरू कर दिया है। बिजली की रफ्तार से फैसले हो रहे हैं। रुकी हुई योजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में आज यहाँ सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है।
पीएम मोदी ने कहा कि “गुलामी के दौर में हमारे बंगाल ने क्या कुछ नहीं सहा, कितने बलिदान दिए, कितने त्याग सहे, 1946 में, कोलकाता में हुई हिंसा, कितने निर्दोष बंगाली लोग उसकी भेंट चढ़ गए। बंगाल ने रक्तपात सहा, अपनों को खोया, अपनी मातृभूमि के टुकड़े होते देखे लेकिन बंगाल ने अपनी अस्मिता, पहचान को नष्ट नहीं होने दिया। इसी का परिणाम था कि जब पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिश हो रही थी तब अलग पश्चिम बंगाल बनाकर उन मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया गया। पश्चिमबंग दिवस के रूप में हम केवल एक तारीख को याद नहीं कर रहे, बल्कि पूरे इतिहास को याद कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज की पीढ़ी को हमें बार-बार पश्चिमबंग दिवस की अहमियत बताने की जरूरत है। उस दौरान क्या हुआ था यह युवा पीढ़ी को जानने की जरूरत है, जब पूरे बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की कोशिश हो रही थी तो कांग्रेस उन षड्यंत्रकारियों के सामने घुटने टेक रही थी। यही वह समय था जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई। अप्रैल 1947 में उन्होंने ऐतिहासिक रिसॉल्यूशन पास कराया। उन्होंने घोषणा की कि पूरा बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा, इसके लिए बंगाली-हिंदू होमलैंड मूवमेंट शुरू किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जिस भावना से पश्चिम बंगाल को बचाया गया था, आज़ादी के बाद उसी भावना पर इसे आगे बढ़ाने की जरूरत थी। लेकिन दुर्भाग्य से ठीक इससे उलट काम हुआ। पश्चिमबंग दिवस और इसकी भावना को भुलाने की कोशिश हुई। सियासी एजेंडों के कारण इतिहास का व्हाइटवॉश किया गया। विभाजन के समय जो कांग्रेस बंगाल को लावारिस छोड़ना चाहती थी, विभाजन के बाद उसने बचे हुए पश्चिम बंगाल में भी तुष्टिकरण के खेल खेलने शुरू किए। पश्चिम बंगाल के इतिहास को दबाया गया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक बने, इसलिए उनके योगदान को नकारा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कल देश, दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना है। इस बार मैं बंगाल में ही योग दिवस का हिस्सा बनूंगा। स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद जैसे योगियों की भूमि से जो संदेश जाएगा उससे पूरे विश्व का मार्गदर्शन होगा। मैं चाहूंगा कि इस बार बंगाल के कोने-कोने में योग दिवस के आयोजन हो।

