कहा, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदना एक सुरक्षित व आसान विकल्प
Crude Oil (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के बीच पश्चिम एशिया में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। ईराल द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के बाद विश्व के सामने पेट्रोल और डीजल की किल्लत खड़ी हो गई है। भारत के सामने भी स्थिति गंभीर है क्योंकि भारत अपनी जरूरतों के लिए ज्यादात्तर कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर है। वर्तमान हालात को देखते हुए भारत एक बार फिर से अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए कच्चे तेल के आयात के लिए रूस की तरफ रुख कर सकता है।
रूसी उपप्रधानमंत्री का यह बयान आया सामने
रूस ने कहा है कि भारत ने फिर से ज्यादा मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। यह बात रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने मॉस्को में कही। उन्होंने बताया कि अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमलों के बाद हालात बदल गए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया में तेल की सप्लाई का सबसे अहम मार्ग माना जाता है।
दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की ढुलाई इसी रास्ते से होती है। अगर यहां लंबे समय तक रुकावट रहती है तो भारत, चीन और जापान जैसे देशों पर असर पड़ सकता है और तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। रूसी मीडिया ने यह भी कहा कि मौजूदा तनाव के कारण रूस को एशियाई देशों, खासकर भारत को दिए जा रहे भारी छूट को कम करने का मौका मिल सकता है। वहीं नोवाक ने संकेत दिया कि ऊर्जा संकट बढ़ने पर यूरोपीय संघ भी रूसी तेल और गैस पर अपनी पाबंदियां नरम कर सकता है।
मंगलवार को यह संकेत दिए थे
रूस ने मंगलवार को संकेत दिया कि वह मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट से पैदा होने वाली किसी भी रुकावट की स्थिति में एनर्जी सप्लाई में भारत की मदद करने के लिए तैयार है। यह बात खाड़ी तनाव के एनर्जी सप्लाई और कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंताओं के बीच कही गई है। सूत्रों के हवाले से कहा कि गल्फ संकट के कारण होने वाली रुकावट की स्थिति में रूस एनर्जी सप्लाई में भारत की मदद करने के लिए तैयार है।
युद्ध को लेकर ट्रंप का यह बयान आया सामने
ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही यह कह चुके हैं कि अमेरिका इस युद्ध को लंबी अवधि तक जारी रख सकता है। गत दिवस ट्रंप ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने युद्ध के शुरूआती दिनों में ही ईरान को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। लेकिन यदि ईरान अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ता तो अमेरिका एक लंबा युद्ध लड़ने के लिए भी तैयार है।
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