सऊदी सरकार ने की मौत की पुष्टि, भारतीय राजदूत ने की सऊदी सरकार से बात
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), रियाद : पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के विरोध में ईरानी सेना अन्य पश्चिमी एशियाई देशों पर हमले कर रहा है। ईरान सबसे ज्यादा हमले सऊदी अरब पर कर रहा है। युद्ध के पहले ही दिन से ईरानी सेना ने सऊदी अरब को टारगेट किया हुआ है। इन्हीं हमलों में ताजा जानकारी के अनुसार दो नागरिकों की मौत हुई है। इनमें से एक भारतीय है।
सऊदी ने इस युद्ध से जुड़े मामलों में पहली बार दो लोगों की मौतों की पुष्टि की है। सऊदी अरब सरकार के अनुसार एक सैन्य प्रोजेक्टाइल (गोला) गिरने से एक भारतीय और एक बांग्लादेशी नागरिक की मौत हो गई। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब सीमा क्षेत्र के पास एक सैन्य गोला आकर गिरा। इस हमले में दोनों विदेशी नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद सऊदी में भारत के राजदूत सुहेल एजाज खान ने सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय को भरोसा दिलाया है कि भारत सरकार उनकी हर संभव मदद के लिए तैयार है।
ईरान ने चुना अपना सुप्रीम लीडर
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। ईरानी सरकारी टीवी ने सोमवार तड़के इसकी घोषणा की। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुआ युद्ध अब एक नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया है। मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से इस पद का संभावित दावेदार माना जा रहा था। उल्लेखनीय है कि मोजतबा ने इससे पहले कभी भी किसी सरकारी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ा और न ही उन्हें किसी पद पर नियुक्त किया गया था।
इस तरह किया गया मोजतबा का चुनाव
ईरान की 88 सदस्यीय धार्मिक विशेषज्ञ सभा ने मोजतबा को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना। ईरान की धार्मिक विद्वान सभा, धार्मिक विद्वानों का समूह है, जो सर्वोच्च नेता का चयन करता है। सरकारी टीवी ने एक बयान पढ़कर सुनाया जिसमें कहा गया कि उन्हें मजबूत समर्थन के आधार पर चुना गया है और देशवासियों से उनके पीछे एकजुट होने की अपील की गई। साथ ही तेहरान के सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के जश्न मनाने के दृश्य भी दिखाए गए।
लगभग आधी सदी पहले हुई इस्लामी क्रांति के बाद से सर्वोच्च नेता के पद पर सत्ता का यह केवल दूसरा हस्तांतरण है।मोजतबा खामेनेई पिछले कई दिनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। अब वह ईरान की सत्ता व्यवस्था के केंद्र में होंगे और राज्य के सभी महत्वपूर्ण मामलों पर अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा। वे सेना और शक्तिशाली अर्धसैनिक संगठन रिवोल्यूशनरी गार्ड के सर्वोच्च कमांडर भी होंगे।

