वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दी जानकारी, कहा हमारे पास पर्याप्त स्टॉक
Crude Oil (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ रहे हालात और ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले तेज होने से विश्व आपूर्ति सप्लाई चेन पूरी तरह से प्रभावित हुई है। इससे पूरे विश्व विशेषकर एशिया में कच्चे तेल की सप्लाई बहुत बुरी तरह से चरमरा गई है। ज्यादात्तर देशों में पेट्रोल और डीजल की किल्लत हो चुकी है और इसके दाम आसमान छूने लगे हैं। लेकिन भारत की स्थिति अलग है। इस संबंध में देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए एक सवाल के जवाब में कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर काफी तेजी आ चुकी है लेकिन भारत में फिलहाल इसका कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारत में निचले स्तर पर महंगाई दर
वित्त मंत्री ने बताया कि भारत की महंगाई दर इस समय अपने ‘निचले स्तर’ के बेहद करीब है, जिस वजह से कच्चे तेल के महंगे होने का तुरंत कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा में आंकड़े पेश करते हुए कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी गई औसत खुदरा महंगाई दर 2023-24 के 5.4% से घटकर 2024-25 में 4.6% और 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) में महज 1.8% पर आ गई है। इसके साथ ही उन्होंने तीसरा कारण बताया कि जनवरी 2026 में हेडलाइन महंगाई दर 2.75% थी, जो रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% से 2% के टॉलरेंस बैंड के सबसे निचले स्तर के पास है।
भारत में महंगाई को यह फैक्ट करेंगे निर्धारित
अक्तूबर 2025 की आरबीआई की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतों में अनुमान से 10% की वृद्धि होती है और इसका पूरा बोझ घरेलू बाजार पर डाला जाता है, तो भी महंगाई दर में केवल 30 बेसिस पॉइंट्स (0.30%) की ही बढ़ोतरी होगी। हालांकि, मध्यम अवधि में महंगाई पर पड़ने वाला असली असर एक्सचेंज रेट (रुपये की चाल), वैश्विक मांग-आपूर्ति और मौद्रिक नीतियों जैसे कई अहम कारकों पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, मजबूत आर्थिक नीतियों के बफर के कारण भारत फिलहाल इस ग्लोबल क्राइसिस से सुरक्षित नजर आ रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि हमने पिछले एक साल से लगातार मजबूती से विकास दर हासिल की है। जब पूरा विश्व टैरिफ के प्रभाव से जूझ रहा था उस समय भारत के घरेलू बाजार और उपभोक्ताओं ने जीडीपी को सहारा दिया। हम उस संघर्षमयी समय से बाहर निकल गए और अब यह इस वैश्विक संघर्ष का हमारे ऊपर ज्यादा असर नहीं होगा।
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