Special Parliament Session, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों को सदन के मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल से 18 अप्रैल के बीच तीन दिन संसद का विशेष सत्र बुलाया है और इस दौरान महिलाओं के आरक्षण से संबंधित विधेयक पर चर्चा होनी है।
सांसदों को सदन में मौजूद रहने का निर्देश
भाजपा द्वारा रविवार को जारी किए गए तीन-लाइन के व्हिप में लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सांसदों को संसद के आगामी सत्र के दौरान 16 से 18 अप्रैल तक सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है कि पार्टी ने उपस्थिति को अनिवार्य बनाते हुए कहा है कि इस अवधि के लिए किसी भी सांसद को छुट्टी नहीं दी जाएगी।
व्हिप का सख्ती से पालन करने के निर्देश
संसद के विशेष सत्र का मुख्य फोकस ‘महिला आरक्षण संशोधन विधेयक’ पर रहेगा। पत्र में लिखा गया है कि सभी माननीय केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के सभी लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों से अनुरोध है कि वे ऊपर बताई गई तीनों तारीखों पर पूरे समय सदन में उपस्थित रहें। सदन में उपस्थिति अनिवार्य है। किसी भी सदस्य को छुट्टी नहीं दी जाएगी। सदस्यों से अनुरोध है कि वे इस व्हिप का सख्ती से पालन करें और सदन में अपनी निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करें।
सरकार की दो बड़े संशोधनों की योजना
सरकार ने दो बड़े संशोधनों की योजना बनाई है। वर्ष 2023 के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में महिलाओं के लिए आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था। जनगणना में हो रही देरी को देखते हुए, अब सरकार ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही आगे बढ़ने का फैसला किया है। बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह ‘महिला आरक्षण विधेयक’ से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों और ‘परिसीमन’ के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाए।
विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया सत्र : खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संसद का यह विशेष सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना ही बुलाया गया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एक सार्थक चर्चा के लिए जरूरी कई अहम विवरण अभी तक स्पष्ट नहीं हैं। अपने पत्र में खड़गे ने लिखा, मुझे अभी-अभी संसद के विशेष सत्र के संबंध में आपका पत्र मिला है, जिसमें 16 अप्रैल से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा का प्रस्ताव है। यह विशेष सत्र हमें विश्वास में लिए बिना ही बुलाया गया है। आपकी सरकार एक तरफ तो हमसे सहयोग की अपेक्षा कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ होने वाले परिसीमन के संबंध में कोई भी विवरण साझा नहीं कर रही है। आप भी इस बात से सहमत होंगे कि परिसीमन और अन्य संबंधित पहलुओं के बारे में पूरी जानकारी मिले बिना, इस ऐतिहासिक कानून पर कोई भी सार्थक चर्चा करना असंभव होगा।
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