यदि जल्द समझौता न हुआ तो तेल, गैस के साथ यूरिया और डीएपी की किल्लत भी होगी
US-Iran Peace Agreement (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध अब एक पहेली बनता जा रहा है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति यह कह रहे हैं कि युद्ध जल्द समाप्त होगा और दोनों पक्ष एक मजबूत समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे वहीं ईरान लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान का खंडन कर रहा है।
जिससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य लगातार बंद है और विश्व सप्लाई प्रभावित हो रही है। होर्मुज पार करते हुए भारतीय जहाजों को भी अब ईरान ने रोकना शुरू कर दिया है। ऐसे ही एक जहाज को बुधवार को भी रोका गया। यदि ऐसा ही चला तो आने वाला समय भारत के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
एफएओ के मुख्य अर्थशास्त्री ने यह शंका जताई
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने भारत को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि खरीफ की फसल की बुवाई से पहले भारत में खाद्य महंगाई का खतरा बढ़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने खाद की सप्लाई को प्रभावित किया है। भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खाद पर 18.6 अरब डॉलर की सब्सिडी दी है। इसके बावजूद खाद की उपलब्धता कम होने का डर है। भारत अपनी जरूरत की लगभग 35 प्रतिशत खाद खाड़ी देशों से मंगवाता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आने से यह सप्लाई रुक गई है।
कीमतों पर दबाव बढ़ना लाजिमी
मैक्सिमो टोरेरो ने बताया कि अगर यह संकट जारी रहा, तो भारत को आयात के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे। इससे गेहूं, चावल और सब्जियों की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। भारत के घरेलू खाद कारखाने भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। गैस की कमी की वजह से ये कारखाने केवल 60 प्रतिशत क्षमता पर चल रहे हैं। पंजाब में नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के प्लांट शुरू तो हुए हैं, लेकिन उनके सामने कई मुश्किलें हैं।
भारत में मई से खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होती है। साल 2026 में मानसून के सामान्य से कम रहने की 60 प्रतिशत संभावना है। अगर खाद के व्यापार में रुकावट 60 दिनों से ज्यादा रहती है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। खाद महंगी होने से किसान इसका इस्तेमाल कम करेंगे, जिससे पैदावार घट जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर चावल, मक्का और गेहूं जैसी फसलों पर पड़ेगा।
वैश्विक स्तर पर खाद की कीमतें पहले ही 50 से 80 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 30 प्रतिशत खाद और 25 प्रतिशत तेल का व्यापार होता है। वहां तनाव की वजह से जहाजों का बीमा बहुत महंगा हो गया है। टैंकरों की आवाजाही 90 से 95 प्रतिशत तक गिर गई है।
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