सोमवार को दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते पर किए हैं हस्ताक्षर, भारत के निर्यातकों को इससे विशेष लाभ
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : सोमवार को भारत ने अपनी नई व्यापारिक नीति के तहत विश्व बाजार में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता जहां दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। वहीं यह भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार खोलेगा।
ज्ञात रहे कि यह एफटीए कम समय में भारत की सबसे तेज व्यापार वातार्ओं में से एक समापन है। दिसंबर में समाप्त हुए इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारत से होने वाले सभी निर्यात पर शुल्क को समाप्त कर देगा, जबकि भारत दक्षिण प्रशांत देश से आयात होने वाले 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क कम कर करेगा।
भारतीय किसानों के हितों को ध्यान में रखा
भारत ने अपने घरेलू किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए समझौता किया है। यह भारत के लिए अच्छा होगा क्योंकि इस समझौते से चुनिंदा कृषि उत्पादों के लिए प्रवेश आसान तो होगा साथ वैश्विक स्तर पर मौजूदा समय में जो दबाव देख रहे हैं, उससे यह राहत देगा। फिलहाल न्यूजीलैंड से आने वाले भेड़ के मांस, ऊन और कोयले के साथ ही उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाएगा। इस समझौते से कीवी, चेरी, एवोकाडो, पर्सिमोन और ब्लूबेरी जैसे फलो की भारतीय बाजारों में आसानी से मिल सकेंगे।
इन क्षेत्रों को भी मिलेगा विशेष लाभ
इस समझौते से वस्त्र, परिधान, चमड़ा और जूते जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा साथ ही कृषि और लघु व मध्यम उद्यमों के लिए विकास की प्रबल संभावना है। इस समझौते पर रुबिक्स डेटा साइंसेज ने एक रिपोर्ट जारी कर बताया है कि समझौता द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक समायोचित हस्तक्षेप है, जिसने मजबूत वृद्धि दिखाई है, लेकिन हाल ही में कुछ नरमी के संकेत भी मिले हैं।
वित्त वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय माल व्यापार 1 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में यह गति धीमी हो गई, अप्रैल-फरवरी के दौरान कुल माल व्यापार घटकर 1.06 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जो एक चरम वर्ष के बाद ठहराव का संकेत देता है। उम्मीद है कि यह समझौता व्यापार प्रवाह को अधिक स्थिरता और पूवार्नुमान प्रदान करेगा, साथ ही दीर्घकालिक विकास के लिए एक ढांचा तैयार करेगा।
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