यूएई के फैसले से ओपेक के कमजोर होने की आशंका
UAE Left OPEC (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पूरी दुनिया में इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के चलते जो सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है वह है कच्चे तेल की कीमतों का लगातार बढ़ना। जब से अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है और ईरान ने बदले में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया है तभी से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है।
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक बड़ा ऐलान करते हुए खुद को ओपेक, और ओपेक प्लस से बाहर करने की घोषणा कर दी है। यूएई की घोषणा के अनुसार आज यानी एक मई से यूएई ओपेक और ओपेक प्लस गठबंधन से बाहर निकल रहा है। इस कदम से कीमतों को नियंत्रित करने की ओपेक की क्षमता कमजोर होने की आशंका है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार रविवार को होने वाली बैठक में ओपेक+ देश तेल उत्पादन कोटा में लगभग 1,88,000 बैरल प्रतिदिन की मामूली वृद्धि पर सहमति जता सकते हैं।
120 डॉलर के पार गई क्रूड की कीमत
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड आॅयल उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जो वर्ष 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में गतिरोध और ईरानी बंदरगाहों व निर्यात पर अमेरिका की लंबी नाकेबंदी की चिंताओं के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से यह भारी उछाल आया है। इस ऊर्जा संकट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक प्रमुख कारण है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश की गई थी; ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि जब तक कोई व्यापक परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक रोक जारी रहेगी। नाकेबंदी के संभावित प्रभावों को कम करने के लिए ट्रंप ने तेल कंपनियों के साथ बैठक भी की है।
लंबा खिंच सकता है पश्चिम एशियाई संकट
वहीं जानकारों का कहना है कि मौजूदा संकेत बताते हैं कि पश्चिम एशियाई संकट उम्मीद से कहीं अधिक समय तक चल सकता है। श्रीवास्तव ने कहा कि भले ही यह संघर्ष सुलझ जाए, लेकिन वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति को पूरी तरह सामान्य होने में काफी समय लगेगा। रिपोर्ट में अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (यूएस ईआईए) के अनुमानों का भी हवाला दिया गया है, जिसमें ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें शखर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
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