First School of India: भारत में “पहला स्कूल” कौन सा है, यह सवाल थोड़ा जटिल है, क्योंकि इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस तरह की शिक्षा प्रणाली की बात कर रहे हैं। अगर आधुनिक स्कूल सिस्टम (क्लासरूम, तय पाठ्यक्रम और औपचारिक शिक्षा) की बात करें, तो St. George’s Anglo-Indian Higher Secondary School को देश के सबसे पुराने स्कूलों में गिना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1715 में हुई थी और यह आज भी सक्रिय रूप से शिक्षा प्रदान कर रहा है।
यह स्कूल चेन्नई में स्थित है और शुरुआत में इसे अनाथ और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। समय के साथ यह एक प्रतिष्ठित संस्थान बन गया, जहां आज भी हजारों छात्र पढ़ाई करते हैं। यहां अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दी जाती है और विज्ञान, गणित, वाणिज्य तथा कला जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। इसके साथ ही खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी बराबर महत्व दिया जाता है।
इस विद्यालय का प्रबंधन चर्च ऑफ साउथ इंडिया द्वारा किया जाता है, जो इसे एक मजबूत नैतिक और सांस्कृतिक आधार प्रदान करता है। करीब 1500 छात्र यहां अध्ययन करते हैं और यहां से पढ़कर निकले कई छात्र देश-विदेश में सफल करियर बना चुके हैं।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि भारत में शिक्षा की परंपरा इससे कहीं अधिक पुरानी है। प्राचीन काल में गुरुकुल प्रणाली मौजूद थी, जहां विद्यार्थी अपने गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे। इसलिए ऐतिहासिक दृष्टि से भारत में शिक्षा की शुरुआत हजारों साल पहले हो चुकी थी, लेकिन आधुनिक स्कूल व्यवस्था के संदर्भ में यह संस्थान सबसे पुराने स्कूलों में शामिल है।
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