होर्मुज को लेकर जल्द नया कानून लाएगा ईरान, आवाजाही पहले जैसी नहीं रहेगी
West Asia Crisis Update (द भारत ख़बर), तेहरान : एक तरफ जहां ईरान लगातार अमेरिका को वार्ता प्रस्ताव भेज रहा है। वहीं ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक नया और बड़ा ऐलान किया है। बताया जा रहा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया कानून लाने की तैयारी कर रहा है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हमीदरेजा हाजी-बाबाई ने कहा कि इस कानून के तहत इजरायल के जहाजों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित बिल में यह भी कहा गया है कि दुश्मन देशों के जहाज तभी गुजर पाएंगे, जब वे युद्ध का मुआवजा देंगे। इसके अलावा, दूसरे देशों के जहाजों को भी ईरान से अनुमति लेनी होगी, तभी वे इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकेंगे। हाजी-बाबाई ने कहा कि अब होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पहले जैसी नहीं रहेगी और युद्ध के बाद हालात बदल जाएंगे।
विश्व की फर्टिलाइजर आपूर्ति पर पड़ रहा असर : यूएन
होर्मुज बंद होने से खाद (फर्टिलाइजर) की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। युद्ध शुरू होने के बाद से खाद की सप्लाई लगभग रुक गई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और कमी भी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था एफएओ के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक बड़े खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है।
इसका असर खेती पर पड़ेगा और फसलों की पैदावार 30% तक घट सकती है। इससे खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं। टोरेरो ने अल जजीरा से कहा कि हालात इसलिए और खराब हो रहे हैं, क्योंकि एशिया में बुआई का समय निकल चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ब्राजील जैसे बड़े देश अपनी फसलें बदल सकते हैं और गेहूं- मक्का की जगह सोयाबीन उगा सकते हैं, जिससे बाजार पर और असर पड़ेगा।
ईरान ने अमेरिका के सामने रखी शर्त
होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान की नाकाबंदी को हटाने की मांग भी शामिल है। इसके साथ ही प्रस्ताव में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने की मांग की गई है। ईरान का यह प्रस्ताव वॉशिंगटन की ओर से पहले भेजे गए नौ सूत्रीय प्रस्ताव के जवाब में आया है, जिसमें कथित तौर पर दो महीने के संघर्ष विराम की समय-सीमा शामिल थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि मैं जल्द ही ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव की समीक्षा करूंगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगा क्योंकि उन्होंने पिछले 47 वर्षों में मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। वहीं, इससे पहले भेजे गए ईरानी प्रस्ताव पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने असहमति जताई थी। उन्होंने इस बात पर संदेह जताया था कि क्या कोई अंतिम समझौता हो सकता है।
ये भी पढ़ें : S. Jaishankar Caribbean Visit : भारत और कैरिबियन देशों में रिश्तें होंगे मजबूत : एस. जयशंकर

